पृथ्वी के बाहर जीवन के बारे में एक और नई खोज वैज्ञानिकों के हाथ लगी है। पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना वाले ग्रहों में वे ग्रह भी शामिल हैं जो बौने सफेद तारों (White Dwarfs) के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। ये ऐसे तारे होते हैं जो अपनी अधिकतम ऊर्जा खर्च कर चुके होते हैं। इनमें बहुत थोड़ी ऊर्जा बची होती है। लेकिन इनके ग्रह जीवन को पनाह दे सकते हैं।
अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और बुच विल्मोर (Butch Wilmore) 9 महीने बाद अपने घर लौट आए हैं। नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर पिछले साल 8 दिनों के स्पेश मिशन पर निकले थे जो कि 9 महीने लंबा खिंच गया। लेकिन आखिरकार दोनों ही अंतरिक्ष यात्री आज सुबह पृथ्वी पर लौट आए हैं।
भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से धरती पर लौटने के लिए तैयार हैं। यह स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से अनडॉक हो चुका है और बुधवार सुबह 3:30 बजे भारतीय समयानुसार लैंड करेगा। नासा ने इस मिशन का शेड्यूल जारी किया है, लेकिन मौसम की स्थिति के आधार पर इसमें बदलाव संभव है।
NASA ने एस्टरॉयड 2024 YR4 को लेकर फिर से एक रिपोर्ट जारी की है। एजेंसी ने एस्टरॉयड के टकराने की संभावना को अब घटा दिया है। पहले यह 32 में से एक थी, और अब यह 360 में से 1 हो गई है। इस एस्टरॉयड का अनुमानित साइज 55 मीटर बताया गया है। अंतरिक्ष से जो अगली चिंताजनक आफत है वह 1950 DA नाम का एस्टरॉयड है।
चंद्रयान-4 का कुल भार लगभग 9,200 किलोग्राम का होगा। यह चंद्रयान-3 की तुलना में दोगुने से अधिक है। इसका साइज अधिक होने की वजह से दो लॉन्च व्हीकल मार्क- III (LVM 3) रॉकेट्स का इस्तेमाल जरूरी है। ये रॉकेट पांच विभिन्न मॉड्यूल्स को धरती के ऑर्बिट में ले जाएंगे, जहां चंद्रमा की यात्रा से पहले इन मॉड्यूल्स की डॉकिंग की जाएगी।
Astronomy & Astrophysics में पब्लिश की गई एक स्टडी बताती है कि वैज्ञानिकों द्वारा पृथ्वी के पास स्थित HD 20794 d नाम के एक एक्सोप्लैनेट की पुष्टि की गई है। इस ग्रह पर पहली बार 2022 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. माइकल क्रेटिनियर ने चिली में HARPS स्पेक्ट्रोग्राफ के डेटा का उपयोग करके संदेह जताया था। इस उपकरण ने ग्रह के मेजबान तारे से लाइट में छोटे बदलावों का पता लगाया, जिससे पता चला कि कुछ है, जो इसकी परिक्रमा कर रहा था।
एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने हाल ही में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की टेल में लगभग 165,000 किमी दूर एक कोरस तरंग का पता लगाया है। यह पहले के अंदाजे से कहीं अधिक दूर है। अब तक, ये तरंगें पृथ्वी के केवल 51,000 किलोमीटर के भीतर ही देखी गई थीं, जहां मैग्नेटिक फील्ड अधिक संरचित है। रिसर्चर्स का मानना था कि टेल में फैला हुई मैग्नेटिक फील्ड ऐसी तरंगों को बनने की अनुमति नहीं देगा, लेकिन यह नई खोज इसके परे कुछ अलग ही साबित करती है।
पृथ्वी पर एक एस्टरॉयड के टकराने से बेहद विनाशकारी मंजर फैल सकता है जिसे लेकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक चेता रहे हैं। फुटबॉल के मैदान के आकार का यह एस्टरॉयड धरती से टकराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह लगभग 8 साल बाद धरती से टकराने की स्थिति में पहुंच सकता है। इसके धरती से टकराने की संभावना 1% से ज्यादा बताई गई है। इसका नाम एस्टरॉयड 2024 YR4 है।
एक भारतीय खगोलशास्त्री दोर्जे अंगचुक (Dorje Angchuk) ने बेहतरीन टाइम-लैप्स वीडियो बनाया है। इसे लद्दाख में शूट किया गया है। वीडियो में वहां की एक साइंस लेबोरेटरी के सामने पृथ्वी को घूमते हुए दिखाया गया है। वीडियो अपने आप में यूनीक है और हमारे ग्रह की गति को लेकर अनूठा दृश्य पेश करता है। दोर्जे अंगचुक लद्दाख के हानले में स्थित ऑब्जर्वेट्री के इंजीनियर इन-चार्ज हैं।
NASA के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक खतरनाक एस्टरॉयड का पता लगाया है। इसका नाम एस्टरॉयड 2024 YR4 है। यह एस्टरॉयड 2032 में धरती से टकरा सकता है। इसके टकराने की संभावना है 83 में से 1 की बताई गई है जो कि चिंताजनक बात है। यह एस्टरॉयड साइज में 130 फीट से लेकर 300 फीट तक बड़ा हो सकता है। अगर यह धरती से टकराता है तो यहां बड़ी तबाही ला सकता है।
वैज्ञानिक वर्षों से ऐसी चहकती (chirping) तरंगों के बारे में जानते हैं, जो खतरनाक रेडिएशन से जुड़ी हैं। ये तरंगें इंसानों और सैटेलाइट्स दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। अब खगोलविदों की एक इंटरनेशनल टीम ने अंतरिक्ष के एक नए क्षेत्र में इन तरंगों का पता लगाया है। इससे सवाल पैदा हुआ है कि आखिर इन तरंगों की उत्पत्ति कहां से होती है। ये तरंगें अंतरिक्ष में मौजूद सबसे पावरफुल नेचुरल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन में से एक हैं।
जियोफिजिसिस्ट की एक टीम ने पृथ्वी के आंतरिक भाग को लेकर नई जानकारी जुटाई है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक भाग की ट्रेडिशनल प्लेट बाउंड्री से दूर डूबी हुई टेक्टोनिक प्लेटों के अवशेषों का पता लगाया है। यह रिसर्च ETH ज्यूरिख और कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी की एक टीम ने की है। उन्होंने पृथ्वी के नीचे ऐसे टेक्टोनिक प्लेटों जैसे क्षेत्र का पता लगाया है, जो महासागरों के नीचे हैं।
अभी तक हम सभी जानते हैं कि माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी है। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े पहाड़ माउंट एवरेस्ट से भी 100 गुना ऊंचे हैं। जर्नल Nature में प्रकाशित शोध के अनुसार, धरती की सतह के नीचे 1000 किलोमीटर बड़े पहाड़ मौजूद हैं। ये पहाड़ लगभग आधा अरब वर्ष पुराने हैं। हालांकि अभी इनके बारे में कई बातें साफतौर पता नहीं चल पाई हैं।
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव (magnetic north pole) तेजी के साथ रूस की तरफ खिसक रहा है। पांच साल पहले यह जहां था, वहां से अब साइबेरिया के करीब पहुंच गया है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ कई सदियों से पृथ्वी के चुंबकीय उत्तरी ध्रुव को ट्रैक कर रहे हैं। इसे वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल का इस्तेमाल करके ट्रैक किया जाता है।
एक बार फिर से एयरोप्लेन जितना बड़ा एस्टरॉयड पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसका नाम है- 2025 AY2। नाम से पता चल जाता है कि एस्टरॉयड को इसी साल खोजा गया है। नासा के अनुसार, यह 220 फीट बड़ा है और 83 हजार 788 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। अनुमान है कि आज यह धरती के करीब से गुजरेगा। तब दोनों के बीच दूरी 67 लाख 90 हजार किलोमीटर रह जाएगी।