2.4 अरब साल पहले 'हरे रंग' की थी हमारी पृथ्वी!

अतीत में एक ऐसा भी समय था जब पृथ्वी के महासागर हरे रंग में चमकते थे!

2.4 अरब साल पहले 'हरे रंग' की थी हमारी पृथ्वी!

Photo Credit: iStock/adventtr

स्टडी कहती है कि अतीत में एक ऐसा भी समय था जब पृथ्वी हरे रंग में चमकती थी! (प्रतीकात्मक फोटो))

ख़ास बातें
  • आर्कियन काल में पृथ्वी के महासागर हरे रंग में नहाए नजर आते थे।
  • लगभग 2.4 अरब साल पहले हुई थी घटना- स्टडी।
  • आधुनिक साइनोबैक्टीरिया को इंजीनियर करके स्टडी की पुष्टि करने का दावा।
विज्ञापन
पृथ्वी को नीला ग्रह भी कहा जाता है। कारण है इसके नीले महासागर जो अंतरिक्ष से इसे नीले रंग की बॉल के जैसे दिखाते हैं। लेकिन क्या पृथ्वी हमेशा से नीले सागरों से घिरी थी? नई स्टडी कुछ और ही कहती है। पॉपुलर टीवी शो कॉसमॉस (Cosmos) में शो के होस्ट Carl Sagan एक बार पृथ्वी को पेल ब्लू डॉट (pale blue dot) के रूप में वर्णित किया था। दरअसल कार्ल Voyager 1 द्वारा ली गई पृथ्वी की एक फोटो के बारे में बता रहे थे। कहा जाता है कि पृथ्वी एक समय में नीली नहीं थी। यह किसी और ही रंग में नजर आती थी। 

इंसानों ने अभी तक पृथ्वी को नीले रंग में ही देखा है। नई स्टडी कहती है कि अतीत में एक ऐसा भी समय था जब पृथ्वी के महासागर हरे रंग में चमकते थे! Nature जर्नल में इस स्टडी को प्रकाशित (via) किया गया है। जिसमें बताया गया है कि लगभग 2.4 अरब साल पहले, आर्कियन काल (Archaean era) में पृथ्वी के महासागर हरे रंग में नहाए नजर आते थे। पृथ्वी पर जीवन के पनपने से पहले, महासागरों की तलहटी में फूटने वाले हाइड्रोथर्मल वेंट ने पानी में रिड्यूस्ड आयरन (ऑक्सीजन की गैरमौजूदगी में जमा हुआ लोहा) ऊपर पंप कर दिया, जिससे समुद्र लौह (ferrous iron) से भर गया।

चूंकि उस समय वायुमंडल में ऑक्सीजन की मौजूदगी नहीं थी, तो सागर आसमान में रिफ्लेक्ट भी नहीं हो पा रहे थे। साइनोबैक्टीरिया के आने के बाद ऑक्सीजन पानी में बनने लगी। इस ऑक्सीजन ने लौह (ferrous iron) को फेरिक आयरन (ferric iron) में बदल दिया जिसने जंग जैसे कणों का निर्माण किया। 

फेरिक आयरन पानी में ही आयरन हाइड्रॉक्साइड के रूप में पड़ा रहा। इसकी गैर-घुलनशील प्रकृति के कारण इसने एक ऑप्टिकल प्रभाव बनाया जिसने रेड और ब्लू वेवलेंथ को सोख लिया। लेकिन ग्रीन लाइट को इसने इस प्रभाव में से गुजरने दिया। इसी वजह से महासागर हरे रंग में नजर आने लगे। अगर उस समय कैमरा होते तो पृथ्वी अंतरिक्ष से देखने पर एमराल्ड ग्रीन (emerald green) कलर में नजर आती। 

इस थ्योरी को वैज्ञानिकों ने सिद्ध भी किया है। शोधकर्ताओं ने फ़ाइकोएरिथ्रोबिलिन नामक एक हरे रंग को सोखने वाले पिग्मेंट का इस्तेमाल करने की सोची। इसके लिए उन्होंने आधुनिक साइनोबैक्टीरिया को आनुवंशिक रूप से इंजीनियर किया। ये संशोधित सूक्ष्मजीव हरे रंग की रोशनी में बेहतर ढंग से विकसित हुए, जो कुछ हद तक प्राकृतिक घटना की नकल थी जो शायद अरबों साल पहले घटित हुई थी।
 
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो की लेटेस्ट खबरें hindi.gadgets 360 पर और हमारे CES 2026 पेज पर देखें

हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News
Turbo Read

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. Republic Day Parade 2026: ट्रैफ‍िक, पार्किंग से लेकर पब्लिक मैनेजमेंट तक, इस तरह AI करेगा पुल‍िस की मदद
  2. Google Pay और Paytm की उड़ेगी नींद, Apple लेकर आ रहा अपनी लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सर्विस
  3. पॉकेट में PC! एक ही मोबाइल में Android और Windows 11 दोनों, हर जगह साथ ले जाएं कंप्यूटर
  4. iOS 27 अपडेट: स्मार्ट AI Siri से लेकर परफॉर्मेंस पर रहेगा फोकस, जानें Apple क्या कुछ करेगा शामिल
  5. OpenAI के कर्मचारी ने कहा कि AI इंजीनियर और सेल्स टीम से पहले खा लेगा रिसर्चर की नौकरी
  6. Oppo A6 5G vs Nothing Phone 3a Lite 5G vs iQOO Z10R 5G: जानें कौन सा फोन है बेस्ट
  7. Flipkart सेल के आखिरी दिन Google का फोन हुआ 15 हजार रुपये सस्ता, जल्द करें खरीदारी
  8. Samsung Galaxy S26 Ultra में हो सकते हैं 6 कलर्स के ऑप्शन
  9. Amazon की सेल में Godrej, Samsung और कई ब्रांड्स के रेफ्रीजरेटर्स पर भारी डिस्काउंट
  10. ईरान में हिंसा के बीच इंटरनेट बंद नहीं करने पर हुई टेलीकॉम कंपनी के CEO की छुट्टी
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »