सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड ( BSNL) के Reliance Jio को पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर की शेयरिंग से जुड़ा बिल नहीं देने की वजह से केंद्र सरकार को 1,757.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
CAG ने एक स्टेटमेंट में बताया, "रिलायंस जियो के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट को लागू करने में BSNL नाकाम रही है। BSNL के शेयर्ड पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर पर इस्तेमाल होने वाली अतिरिक्त टेक्नोलॉजी के लिए रिलायंस जियो को लगभग 10 वर्षों तक बिल नहीं दिया गया। इससे केंद्र सरकार को 1,757.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।" इसके साथ ही CAG ने बताया है कि BSNL ने पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग चार्ज भी कम लिया है। इस स्टेटमेंट में कहा गया है, "BSNL ने रिलायंस जियो के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट के नियम और शर्तों का पालन नहीं किया और चार्ज बढ़ाने की शर्त को लागू नहीं किया गया। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग चार्ज की मद में 29 करोड़ रुपये (BSNL) के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है।"
हाल ही में सरकार ने बताया था कि BSNL को 4G नेटवर्क के लॉन्च में देरी और
मोबाइल सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है। प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो और Bharti Airtel का 5G नेटवर्क देश के बड़े हिस्से में मौजूद है। BSNL को इन कंपनियों का मुकाबला करने में मुश्किल हो रही है। मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर टेलीकॉम Pemmasani Chandra Sekhar ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया था कि
BSNL ने 4G की एक लाख साइट्स के लिए परचेज ऑर्डर दिए हैं। इनमें से लगभग 84,000 साइट्स को इंस्टॉल किया गया है और 74,521 साइट्स शुरू हो चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि 4G नेटवर्क के लॉन्च में देरी और मोबाइल सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा से कंपनी के रेवेन्यू पर असर पड़ा है।
BSNL के 4G नेटवर्क को जून से 5G पर अपग्रेड करने की योजना है। दुनिया में भारत पांच ऐसे देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने अपनी 4G टेक्नोलॉजी को डिवेलप किया है। सरकार का लक्ष्य इस एक्सपर्टाइज का 5G तक विस्तार करने का है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से BSNL को 4G नेटवर्क के एक्सपैंशन के लिए 6,000 करोड़ रुपये की फंडिंग को स्वीकृति दी गई थी।