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Facebook, Instagram जैसे ऐप चलाने के लिए जरूरी होगा ऐज वैरिफिकेशन! आया प्रस्ताव

केवाईसी लिंक्ड यूजर अकाउंट्स और ऐज गेटिंग सिस्टम तैयार किए जाने की सिफारिश की गई है।

Facebook, Instagram जैसे ऐप चलाने के लिए जरूरी होगा ऐज वैरिफिकेशन! आया प्रस्ताव
ख़ास बातें
  • गृह एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को की सिफारिश
  • महिला सशक्तिकरण पर संसदीय समिति की रिपोर्ट में सिफारिश
  • सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप, गेमिंग ऐप्स के लिए हो वैरिफिकेशन
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भारत में सोशल मीडिया, डेटिंग, और गेमिंग ऐप चलाने के लिए जल्द ही उम्र की वैरिफिकेशन लागू हो सकती है। इसकी सिफारिश संसदीय पैनल की ओर से की गई है। पैनल ने गृह एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सिफारिश की है कि ऑनलाइन सेफ्टी के लिए ऐज वैरिफिकेशन प्रक्रिया को लागू किया जाना चाहिए। प्रस्ताव को महिला सशक्तिकरण पर संसदीय समिति की 'साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा' पर रिपोर्ट का हिस्सा बताया गया है। 

भारत में ऑनलाइन सेफ्टी के लिए ऐज वेरिफिकेशन को लागू करने की सिफारिश की गई है। ऐसा इसलिए ताकि महिलाओं और नाबालिगों के लिए साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। खासकर सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप, गेमिंग ऐप्स के इस्तेमाल के संबंध में यह प्रस्ताव (via) पेश किया गया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वह फर्जी प्रोफाइल, प्रतिरूपण और गुमनाम उत्पीड़न के खतरे को रोकने के लिए यह कदम उठाने की मांग कर रही है। जिसमें सभी सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर केवाईसी-आधारित वैरिफिकेशन को अनिवार्य रूप से शुरू करने की बात कही गई है।

सिफारिश में कहा गया कि प्लेटफ़ॉर्मों को समय-समय पर री-वैरिफिकेशन करना चाहिए और दुरुपयोग की बार-बार रिपोर्ट किए जाने वाले अकाउंट्स के लिए हाई रिस्क वाले फ्लैग दिखाए जाने चाहिएं। डेटिंग और गेमिंग ऐप्स के लिए सख्त लाइसेंसिंग नियम होने चाहिएं, जिसके साथ आयु सत्यापन प्रोटोकॉल भी लागू हो। साथ ही उन प्लेटफॉर्म्स के लिए यहां पैनल्टी का प्रावधान भी हो जो महिलाओं और नाबालिगों को धोखाधड़ी या जबरदस्ती जैसे मामलों से बचाने में विफल रहें। 

ऐसे मामलों में केवाईसी लिंक्ड यूजर अकाउंट्स और ऐज गेटिंग सिस्टम तैयार किए जाने चाहिएं जिससे उन्हें ट्रेस किया जा सके, और उम्र के अनुसार कंटेंट को प्रतिबंधित किया जा सके। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग भी रोका जा सके। सिफारिश में कहा गया है कि ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग और आईडी की चोरी के साथ ही सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार, धमकियां, फर्जी प्रोफाइल जैसी चीजें आम हो चुकी हैं। इन स्टेप्स के तहत यूजर्स की पहचान वैरिफाई करने और नाबालिगों के लिए सख्त नियंत्रण लागू करने के लिए प्लेटफार्मों को आधिकारिक दस्तावेजों की अनिवार्यता को लागू करना पड़ सकता है। सिफारिश के बाद ये प्रस्ताव कब तक लागू होते हैं यह देखने वाली बात होगी। इस बीच प्रस्तावों से प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा और व्यवहार्यता को लेकर बहस छिड़ने की आशंका है।
 

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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