• होम
  • विज्ञान
  • ख़बरें
  • ब्रह्मांड भी गुनगुनाता है! भारत और दुनिया के 190 वैज्ञानिकों ने 15 साल मेहनत के बाद गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सुना

ब्रह्मांड भी गुनगुनाता है! भारत और दुनिया के 190 वैज्ञानिकों ने 15 साल मेहनत के बाद गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सुना

Humming gravitational waves : गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्‍व की भविष्यवाणी महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने पहले ही कर दी थी।

ब्रह्मांड भी गुनगुनाता है! भारत और दुनिया के 190 वैज्ञानिकों ने 15 साल मेहनत के बाद गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सुना

Photo Credit: Unsplash/सांकेतिक तस्‍वीर

माना जाता है कि गुरुत्वाकर्षण तरंगें हमारे शुरुआती ब्रह्मांड में विशालकाय ब्‍लैक होल के विलय से पैदा हुईं।

ख़ास बातें
  • इस खोज में 7 भारतीय संस्‍थानों के वैज्ञानिक भी शामिल थे
  • लो-पिच वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों को पहली बार सुना गया
  • पुणे स्थित मेट्रोवेव रेडियो टेलीस्कोप ने भी निभाई भूमिका
विज्ञापन
वर्षों की मेहनत के बाद दुनियाभर के खगोलविदों की एक टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। उन्‍होंने पहली बार ब्रह्मांड में गूंजने वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों (gravitational waves) को सुना है। खास यह है कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्‍व की भविष्यवाणी महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने पहले ही कर दी थी। इस खोज में 7 भारतीय संस्‍थानों के वैज्ञानिक भी शामिल थे। लो-पिच वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए दुनिया के 6 रेडियो टेलिस्‍कोप को इस्‍तेमाल किया गया। इनमें पुणे स्थित मेट्रोवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) भी शामिल था। 

खोज से जुड़ी जानकारी द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में इसी महीने पब्लिश हुई है। दुनियाभर के करीब 190 वैज्ञानिकों की टीम बीते 15 साल से इस खोज पर काम कर रही थी। पुणे स्थित मेट्रोवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) का काम, ब्रह्मांड से मिलने वाले सिग्‍नलों को जुटाना और उनकी सटीकता को बढ़ाना था, ताकि गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पुष्टि हो सके। 

टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, माना जाता है कि गुरुत्वाकर्षण तरंगें हमारे शुरुआती ब्रह्मांड में विशालकाय ब्‍लैक होल के विलय से पैदा हुईं। इस खोज से वैज्ञानिकों को ब्‍लैक होल्‍स के विलय से जुड़े रहस्‍यों का पता लगाने में मदद मिलेगी 

रिपोर्ट के अनुसार, इस खोज की शुरुआत साल 2002 में हो गई थी। साल 2016 में इसमें इंडियन पल्‍सर टाइमिंग ऐरे (InPTA) भी जुड़ गया। इसका मकसद भी लो फ्रीक्‍वेंसी वाली नैनो हर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना है। इसके प्रयोगों में NCRA (पुणे), TIFR (मुंबई), IIT (रुड़की), IISER (भोपाल), IIT (हैदराबाद), IMSc (चेन्नई) और आरआरआई (बेंगलुरु) के साथ ही जापान की कुमामोटो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स शामिल थे। 

गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सबसे पहले साल 1916 में अल्‍बर्ट आइंस्टीन ने प्रस्‍तावित किया था। अब जाकर इनकी लो-पिच को सुना जा सका है। गुरुत्वाकर्षण तरंगें तब पैदा होती हैं, जब ब्‍लैक होल्‍स का विलय होता है। इस खोज के बाद वैज्ञानिक ब्‍लैक होल्‍स को और गहराई से समझ पाएंगे। 

 
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. ईरान में इंटरनेट पहुंचाने के लिए अमेरिका से फंड का इंतजार
  2. Oppo Find N6 में होगी 16GB रैम, Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिप, 80W चार्जिंग! लॉन्च से पहले खुलासा
  3. Gmail के ये 4 एडवांस फीचर आपको बना देंगे सुपर स्मार्ट!
  4. IND vs PAK T20 Live Streaming: T20 वर्ल्डकप में भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट महामुकाबला, यहां देखें फ्री!
  5. New Aadhaar Card: आधार कार्ड डिजाइन बदलेगा! फोटो, क्यूआर कोड के साथ मिल सकता है बिल्कुल नया रूप
  6. 700 फीट की चट्टान धरती से टकराएगी? नासा ने जारी किया एस्टरॉयड अलर्ट
  7. 10100mAh बैटरी वाला सस्ता टैबलेट Honor Pad X8b लॉन्च, 11 इंच 90Hz डिस्प्ले, जानें कीमत
  8. 10 हजार रुपये से ज्यादा सस्ता मिल रहा Samsung का 50MP तीन कैमरा, 5000mAh बैटरी वाला फोन!
  9. Poco C81 Pro में मिल सकता है 6.9 इंच LCD डिस्प्ले, NBTC पर हुई लिस्टिंग
  10. Android 17 आ गया! Beta 1 का रोलआउट शुरू, इन स्मार्टफोन्स को मिलेगा पहला अपडेट, ऐसे करें इंस्टॉल
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »