रूस ने बनाया पनडुब्बी में लगने वाला दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु समुद्री हथियार!
रूस ने बनाया पनडुब्बी में लगने वाला दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु समुद्री हथियार!
रूस ने पोसिडॉन (Poseidon) नाम के सुपर टॉरपीडो (torpedoes) का पहला सेट तैयार कर लिया है, जो परमाणु-सक्षम हथियार है।
Written by नितेश पपनोई,
अपडेटेड: 19 जनवरी 2023 22:46 IST
Photo Credit: Representative Image
इस टॉरपीडो का नाम पोसिडॉन (Poseidon) है
ख़ास बातें
पोसाइडॉन (Poseidon) नाम का सुपर टॉरपीडो बनकर तैयार
रूस ने पूरा किया पहला सेट
"इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर पावर्ड न्यूक्लियर आर्म्ड ऑटोनॉमस टॉरपीडो" है
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रूस ने कथित तौर पर पोसिडॉन (Poseidon) परमाणु-सक्षम सुपर टॉरपीडो (torpedoes) का पहला सेट तैयार कर लिया है। एक रूसी पब्लिकेशन ने लोकल समाचार एजेंसी के हवाले से जानकारी दी है कि पोसाइडन का पहला सेट बना लिया गया है और बेलगॉरॉड पनडुब्बी उन्हें निकट भविष्य में प्राप्त करने वाली है। Poseidon कथित तौर पर एक "इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर-पावर्ड न्यूक्लियर-आर्म्ड ऑटोनॉमस टॉरपीडो" है, जिसकी अपनी खुद की परमाणु ऊर्जा सप्लाई है।
राज्य द्वारा संचालित समाचार एजेंसी TASS का हलावा देते हुए The Moscow Times की रिपोर्ट कहती है कि रूस ने पोसिडॉन (Poseidon) नाम के सुपर टॉरपीडो (torpedoes) का पहला सेट तैयार कर लिया है, जो परमाणु-सक्षम हथियार है। इन टॉरपिडो के डेवलपमेंट की घोषणा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार 2018 में की थी।
रिपोर्ट बताती है कि सेना के एक करीबी सूत्र ने TASS को बताया कि लंबे समय से प्रतीक्षित Poseidon सुपर टॉरपीडो का पहला बैच Belgorod परमाणु पनडुब्बी द्वारा उपयोग के लिए तैयार किया गया था। Poseidon एक "इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर-पावर्ड न्यूक्लियर-आर्म्ड ऑटोनॉमस टॉरपीडो" है, जिसकी अपनी न्यूक्लियर पावर सप्लाई है।
इस अनाम सैन्य सूत्र ने एजेंसी को यह भी बताया कि Poseidon के परमाणु ऊर्जा सोर्स सहित इसकी मुख्य यूनिट्स के अलग-अलग परीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरे हो चुके थे। पोसीडॉन के पूरा होने पर रूसी सेना ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
नवंबर, 2022 में CNN की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि रूसी नौसेना ने आर्कटिक महासागर में पोसीडॉन मिसाइल का परीक्षण करने का असफल प्रयास किया था। पोसीडॉन का विकास एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि से अमेरिका की वापसी के लिए रूसी प्रतिक्रिया थी और इसका उद्देश्य अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को दूर करने के लिए रूस की क्षमता को बढ़ाना था।
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