NASA के चांद मिशन में एस्ट्रोनॉट्स के हाथ में होगा खास बैंड, जानें कैसे करेगा काम

NASA Artemis II मिशन में astronauts खास रिस्टबैंड पहनेंगे, जो उनकी नींद, स्ट्रेस और बिहेवियर को ट्रैक करेगा।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 24 मार्च 2026 13:42 IST
ख़ास बातें
  • Artemis II में astronauts की नींद और स्ट्रेस रियल-टाइम ट्रैक होगा
  • Archer स्टडी से Moon और Mars मिशन के लिए डेटा मिलेगा
  • 2 अप्रैल 2026 को NASA का crewed deep space मिशन लॉन्च होगा

NASA Artemis II मिशन में astronauts की हेल्थ ट्रैक करने के लिए रिस्टबैंड

Photo Credit: NASA

NASA के Artemis II मिशन को लेकर नई डिटेल्स सामने आई हैं, जो इसे सिर्फ एक स्पेस मिशन नहीं बल्कि इंसानी व्यवहार और हेल्थ पर बड़ा रिसर्च प्रोजेक्ट भी बनाती हैं। यह मिशन Apollo के बाद पहला मौका होगा जब इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर डीप स्पेस में जाएगा। खास बात यह है कि इस बार अंतरिक्ष यात्रियों पर एक खास स्टडी भी की जाएगी, जिसमें उनके स्लीप पैटर्न, स्ट्रेस और टीमवर्क को करीब से ट्रैक किया जाएगा। इसके लिए सभी चार यात्रियों को कलाई में पहनने वाला बैंड पहनाया जाएगा। चलिए जानते हैं कि ये रिस्टबैंड क्या काम करेगा।

NASA Artemis II मिशन को 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जो भारत के समयानुसार सुबह 3:54 बजे होगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री Orion कैप्सूल के जरिए चांद के आसपास की यात्रा करेंगे और करीब 10 दिन तक स्पेस में रहेंगे। यह मिशन इंसानों की चांद पर वापसी की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

इस मिशन के दौरान “Archer” नाम की एक खास स्टडी की जाएगी, जिसका पूरा नाम Artemis Research for Crew Health and Readiness है। इसके तहत सभी अंतरिक्ष यात्रियों को खास रिस्टबैंड पहनाए जाएंगे, जो उनकी नींद, स्ट्रेस लेवल, मूवमेंट और बिहेवियर से जुड़ा डेटा रियल-टाइम में रिकॉर्ड करेंगे। कंपनी के मुताबिक इस डेटा से यह समझने में मदद मिलेगी कि डीप स्पेस में अलग-थलग माहौल इंसानों पर किस तरह असर डालता है।

मिशन में NASA के Reid Wiseman, Victor Glover और Christina Koch के साथ Canadian Space Agency के Jeremy Hansen शामिल होंगे। इन सभी के डेटा को मिशन से पहले, दौरान और बाद में इकट्ठा किया जाएगा, जिससे उनके काग्निटिव परफॉर्मेंस, बिहेवियर और टीमवर्क को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

लो-अर्थ ऑर्बिट मिशन के मुकाबले डीप स्पेस मिशन ज्यादा लंबे और चुनौतीपूर्ण होते हैं, जहां मानसिक दबाव और अलगाव ज्यादा होता है। ऐसे में यह रिसर्च भविष्य के मिशन, खासकर Mars मिशन के लिए अहम साबित हो सकती है।

NASA के Human Research Program के तहत इकट्ठा किया गया यह डेटा भविष्य में नई टेक्नोलॉजी, प्रोटोकॉल और सिस्टम बनाने में मदद करेगा, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों की सेफ्टी और परफॉर्मेंस बेहतर की जा सके। NASA की साइकोलॉजिस्ट Suzanne Bell के मुताबिक यह स्टडी यह समझने में मदद करेगी कि अंतरिक्ष यात्री टीम के रूप में कैसे काम करते हैं और मिशन कंट्रोल के साथ उनका कोऑर्डिनेशन कैसा रहता है।

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