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क्लाइमेट चेंज के लक्ष्य पूरे करने पर भी दुनिया के कई हिस्सों में होगा गर्मी का कहर

इन हिस्सों में भारतीय उपमहाद्वीप, सब-सहारन अफ्रीका और अरेबियन पेनिसुला शामिल हैं, जहां तापमान अधिक रहेंगे

क्लाइमेट चेंज के लक्ष्य पूरे करने पर भी दुनिया के कई हिस्सों में होगा गर्मी का कहर

कई देशों में बाहर कार्य करने की क्षमता में भी कमी आएगी

ख़ास बातें
  • यह स्टडी विशेष स्तर तक ह्युमिडिटी को मापने वाले हीट इंडेक्स पर बेस्ड है
  • पिछले कुछ वर्षों में यूरोप के अधिकतर हिस्सों में तापमान बढ़ा है
  • दुनिया भर में कार्बन इमिशन को घटाने की कोशिशें हो रही हैं
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पिछले कुछ वर्षों में धरती के बढ़ते तापमान और इसके जीवन पर प्रतिकूल प्रभावों के कारण दुनिया भर में क्लाइमेट चेंज से निपटने की कोशिशें की जा रही हैं। क्लाइमेट चेंज पर पेरिस एग्रीमेंट में वैश्विक गर्मी को कम करने का लक्ष्य तय किया गया है। हालांकि, एक नई स्टडी से संकेत मिल रहा है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने पर भी इस सदी के अंत तक दुनिया के बहुत से हिस्सों में वर्ष की अधिकतर अवधि में बहुत अधिक गर्मी होगी।

इन हिस्सों में भारतीय उपमहाद्वीप, सब-सहारन अफ्रीका और अरेबियन पेनिसुला शामिल हैं, जहां तापमान अधिक रहेंगे। इसके अलावा दुनिया के मध्य अक्षांशों में लू की मार पड़ेगी। ऐसे क्षेत्रों में अमेरिका का शिकागो शहर भी शामिल है। रिसर्चर्स की टीम ने वैश्विक औसत तापमान में बदलावों और शिकागो में तापमान के बढ़ने की स्थितियों का आकलन किया है। इसमें कहा गया है कि शिकागो में इस सदी के अंत तक खतरनाक लू में 16 गुणा का इजाफा होगा। रिसर्चर्स का कहना है कि अगर वैश्विक गर्मी को औद्योगिकीकरण से पहले से स्तरों से 1.5 डिग्री कम पर सीमित किया जा सकता है, तो भी दुनिया में 2050 तक गर्मी 2 डिग्री बढ़ जाएगी। 

Communications Earth & Environment में प्रकाशित इस स्टडी में कहा गया है, " भारतीय उपमहाद्वीप, सब-सहारन अफ्रीका और अरेबियन पेनिसुला में बहुत अधिक गर्मी नियमित तौर पर रहेगी।" यह स्टडी एक विशेष स्तर तक ह्युमिडिटी को मापने वाले हीट इंडेक्स पर बेस्ड है। इसके अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में खतरनाक हीट इंडेक्स 2050 तक वर्ष के लगभग आधे दिनों पर रह सकता है। इसके अलावा लगभग 25 प्रतिशत दिनों का तापमान बहुत अधिक होगा। 

रिसर्चर्स का कहना है पर्याप्त उपायों और कार्बन एमिशन में कमी के बिना तापमान में इस बढ़ोतरी से गर्मी से जुड़ी बीमारियां बढ़ेंगी। इसके अलावा कई देशों में बाहर कार्य करने की क्षमता में भी कमी आएगी। पिछले कुछ वर्षों में यूरोप के अधिकतर हिस्सों में गर्मी बढ़ी है। इस वर्ष भी कई यूरोपीय देशों में तापमान बढ़ने के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। दुनिया भर में कार्बन इमिशन को घटाने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, ये कोशिशें लक्ष्य से बहुत कम हैं। अमेरिका ने क्लाइमेट चेंज से निपटने की योजना के लिए दिए जाने वाले फंड में भी कमी की है।   ने वाले फंड में भी कटौती की है। 
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