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कभी देखा है गर्म चांद? Nasa ने ली बृहस्‍पति के चंद्रमा ‘आईओ’ की नई तस्‍वीर, जानें इसके बारे में

Jupiter Io : चांद की सतह पर काल्डेरा ज्‍वालामुखी दिखाई दे रहा है। ऐसे हजारों ज्‍वालामुखी इस चांद को बाकी चंद्रमाओं से गर्म बनाते हैं।

कभी देखा है गर्म चांद? Nasa ने ली बृहस्‍पति के चंद्रमा ‘आईओ’ की नई तस्‍वीर, जानें इसके बारे में

Photo Credit: Nasa

यह तस्‍वीर नासा के जूनो स्‍पेसक्राफ्ट (Juno Spacecraft) ने ली है।

ख़ास बातें
  • नासा ने बृहस्‍पति के चंद्रमा आईओ की नई तस्‍वीर ली
  • चांद की सतह पर काल्डेरा ज्‍वालामुखी दिखाई दे रहा
  • आईओ के लिए आखिरी नजदीकी उड़ान के दौरान ली गई तस्‍वीर
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने बृहस्‍पति ग्रह के चंद्रमा आईओ (Io) की नई तस्‍वीर ली है। इसके बैकड्रॉप में स्‍पेस को दिखाया गया है। तस्‍वीर में देखा जा सकता है कि आईओ का दाहिना इलाका सूर्य की रोशनी से चमक रहा है। चांद की सतह पर काल्डेरा ज्‍वालामुखी दिखाई दे रहा है। ऐसे हजारों ज्‍वालामुखी इस चांद को बाकी चंद्रमाओं से गर्म बनाते हैं। यह तस्‍वीर नासा के जूनो स्‍पेसक्राफ्ट (Juno Spacecraft) ने ली है। 

रिपोर्ट के अनुसार, जूनो ने बीते शनिवार को बृहस्पति के चंद्रमा आईओ के करीब से अपना आखिरी चक्‍कर पूरा किया। इससे पहले पिछले साल 30 दिसंबर को जूनो स्‍पेसक्राफ्ट, आईओ के करीब पहुंचा था। तब भी उसने आईओ की तस्‍वीरें ली थीं। 
 


पिछली बार नजदीकी उड़ान के दौरान जूनो स्‍पेसक्राफ्ट को बहुत ज्‍यादा रेडिएशन का सामना करना पड़ा था। साल साल 2016 में जूनो स्‍पेसक्राफ्ट बृहस्‍पति ग्रह की कक्षा में पहुंचा था। तब से यह लगातार उसकी निगरानी कर रहा है। 8 अप्रैल 2023 को जूनो ने बृहस्‍पति ग्रह का 50वां क्लोज पास पूरा किया था। यानी स्‍पेसक्राफ्ट ने बृहस्‍पति के चारों ओर 50 परिक्रमाएं पूरी कर लीं। यह स्‍पेसक्राफ्ट बृहस्‍पति ग्रह के अन्‍य चंद्रमाओं को भी टटाेल रहा है, जिनमें गेनीमेड प्रमुख है। 
 

क्‍यों गर्म है आईओ ज्‍वालामुखी 

रिपोर्ट के अनुसार, आईओ को बृहस्पति ग्रह और उसके अन्‍य चंद्रमाओं की वजह से तेज गुरुत्वाकर्षण बल का सामना करना पड़ता है। इससे वहां ज्वालामुखी गतिविधियां होती हैं और ज्‍वालामुखी विस्फोट और लावा निकलते हैं।  
 

जूनो स्‍पेसक्राफ्ट क्‍यों उड़ रहा आईओ के करीब 

जूनो स्‍पेसक्राफ्ट की उड़ान का मुख्‍य मकसद आईओ में होने वाली ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं को समझना है। वह यह भी पता लगाना चाहता है कि क्‍या इसकी सतह के नीचे मैग्मा ओशियन है। पिछली उड़ान के दौरान जूनो स्‍पेसक्राफ्ट, आईओ के 1500 किलोमीटर तक करीब पहुंच गया था। 
 
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