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Fake Traffic Challan Scam: 500 रुपये बचाने गए और गंवा दिए लाखों, ऐसे बचें इस नए साइबर स्कैम से

फेक ट्रैफिक चालान स्कैम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुणे और दिल्ली में लोगों से लाखों रुपये की ठगी हुई, जहां नकली लिंक के जरिए बैंक डिटेल्स चोरी की गईं।

Fake Traffic Challan Scam: 500 रुपये बचाने गए और गंवा दिए लाखों, ऐसे बचें इस नए साइबर स्कैम से

Photo Credit: Unsplash/ NordWood Themes

फेक ट्रैफिक चालान मैसेज के जरिए लोगों से लाखों रुपये की ठगी

ख़ास बातें
  • फेक चालान मैसेज से पुणे और दिल्ली में लाखों की ठगी
  • लिंक पर क्लिक करते ही बैंक डिटेल्स और फोन का कंट्रोल जा सकता है
  • पुलिस ने अनजान लिंक और फर्जी वेबसाइट से सावधान रहने को कहा
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देश में इन दिनों फेक ट्रैफिक चालान के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठग लोगों को SMS, WhatsApp या ईमेल के जरिए नकली चालान भेजकर डर और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं। हाल के दो मामलों में लोगों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इन मैसेज में खुद को RTO या सरकारी नोटिस जैसा दिखाया जाता है, जिससे लोग इसे असली समझकर लिंक पर क्लिक कर देते हैं। पुलिस के मुताबिक यह स्कैम अब पहले से ज्यादा संगठित और खतरनाक हो गया है।

लेटेस्ट घटना पुणे से रिपोर्ट की गई है, जहां एक 57 वर्षीय दुकानदार से करीब 2.76 लाख रुपये की ठगी हुई। यह घटना दिसंबर 2025 की बताई गई है। पुलिस के अनुसार (via TOI), पीड़ित को ‘RTO Challan' नाम से एक मैसेज मिला, जिसमें एक लिंक दिया गया था। असली चालान समझकर उसने लिंक खोला और एक फॉर्म में अपनी बैंकिंग जानकारी भर दी।

विष्रामबाग पुलिस के मुताबिक, लिंक पर क्लिक करने के बाद उसके फोन में एक रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस का कंट्रोल मिल गया। इसके बाद आरोपियों ने उसके बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लिए। पुलिस का यह भी कहना है कि ठगों ने फोन का कंट्रोल मिलने के बाद ट्रांजैक्शन अलर्ट मैसेज भी डिलीट कर दिए, जिससे पीड़ित को तुरंत पता नहीं चल सका।

हाल ही में इसी तरह का एक और मामला दिल्ली के लक्ष्मी नगर से सामने आया था, जहां 65 वर्षीय व्यक्ति को नकली चालान के नाम पर ठगा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पास 500 रुपये के चालान का मैसेज आया था, जिसमें पेमेंट लिंक दिया गया था। शख्स ने इसे असली समझकर अपने क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने की कोशिश की।

हालांकि शुरुआती पेमेंट सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके बैंक अकाउंट से करीब 2.49 लाख रुपये कट गए। पुलिस के अनुसार यह ट्रांजैक्शन इंटरनेशनल रूट के जरिए किया गया था। इस मामले में धोखाधड़ी और पहचान के दुरुपयोग का केस दर्ज किया गया है।

कैसे काम करता है फेक चालान स्कैम?

साइबर ठग इस स्कैम को इस तरह डिजाइन करते हैं कि यह बिल्कुल असली सरकारी नोटिस जैसा लगे।
आमतौर पर आपको एक मैसेज मिलता है जिसमें कहा जाता है कि आपका ट्रैफिक चालान बकाया है। इसमें सरकारी भाषा और लोगो का इस्तेमाल किया जाता है और तुरंत भुगतान करने के लिए लिंक या QR कोड दिया जाता है।
यह लिंक अक्सर किसी नकली वेबसाइट पर ले जाता है, जो Parivahan पोर्टल जैसी दिखती है। यहां यूजर से कार्ड डिटेल, OTP या बैंकिंग जानकारी मांगी जाती है और जैसे ही यह जानकारी दी जाती है, खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

ये संकेत दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं

पुलिस के मुताबिक कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो फेक चालान स्कैम की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

  • अगर मैसेज में अज्ञात लिंक हो, OTP या CVV मांगा जा रहा हो, लाइसेंस सस्पेंड करने की धमकी दी जा रही हो या चालान नंबर और वाहन की जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई हो, तो सावधान हो जाएं।
  • इसके अलावा अगर पेमेंट के लिए किसी थर्ड पार्टी ऐप या .gov.in के अलावा किसी अन्य लिंक का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह फर्जी होने की संभावना ज्यादा होती है।

ट्रैफिक चालान ऐसे करें सही तरीके से चेक

  • ऐसे स्कैम से बचने के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
  • आप अपना चालान केवल parivahan.gov.in पर जाकर ही चेक करें और वहां वाहन नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी वेबसाइट पर अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर करने से बचें। सरकारी विभाग आमतौर पर व्यक्तिगत मैसेज के जरिए पेमेंट की मांग नहीं करते।

अगर ठगी हो जाए तो क्या करें

  • अगर आपको शक है कि आप ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है।
  • सबसे पहले 1930 (National Cyber Crime Helpline) पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही अपने बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी को तुरंत जानकारी दें, ताकि आगे की ट्रांजैक्शन रोकी जा सके।
  • पुलिस के मुताबिक शुरुआती 60 मिनट काफी अहम होते हैं, इसलिए देरी न करें।

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नितेश पपनोई Nitesh has almost seven years of experience in news writing and reviewing tech products like smartphones, headphones, and smartwatches. At Gadgets 360, he is covering all ...और भी
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