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भारत की सेमीकंडक्टर योजना में वैश्विक स्थिति के कारण बड़ा इनवेस्टमेंट होने की संभावना

सरकार 28-45 नैनोमीटर के चिप्स के लिए 40 प्रतिशत और 45-65 नैनोमीटर तक के चिप्स के लिए 30 प्रतिशत तक वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगी

भारत की सेमीकंडक्टर योजना में वैश्विक स्थिति के कारण बड़ा इनवेस्टमेंट होने की संभावना

इलेक्ट्रॉनिक्स चिप और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स लगाने के लिए पांच कंपनियों ने प्रपोजल दिए हैं

ख़ास बातें
  • सरकार की ओर से डिजाइन और इनोवेशन को भी काफी महत्व दिया जा रहा है
  • इससे कंपनियों की इस सेगमेंट में यूनिट्स लगाने में दिलचस्पी बढ़ी है
  • सेमीकंडक्टर्स के लिए सरकार ने एक इंसेंटिव स्कीम घोषित की है
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देश में सेमीकंडक्टर सेगमेंट को लेकर केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड IT के मिनिस्टर ऑफ स्टेट राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि वैश्विक स्थिति के कारण इसमें बड़ा इनवेस्टमेंट होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से डिजाइन और इनोवेशन को भी काफी महत्व दिया जा रहा है। चंद्रशेखर का कहना था कि कोरोना की महामारी के दौरान भारत के प्रदर्शन से यह टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट्स देशों में शामिल हो गया है। 

इंटरनेशनल VLSI एंड एम्बेडेड सिस्टम्स कॉन्फ्रेंस में चंद्रशेखर ने कहा, "सेमीकंडक्टर सेगमेंट के लिए हमारी महत्वाकांक्षा बहुत स्पष्ट है। इसके लिए निश्चित तौर पर बड़े इनवेस्टमेंट की जरूरत है। स्किल्स तैयार करने में सरकार की ओर से निवेश किया जा रहा है।" सरकार को इलेक्ट्रॉनिक्स चिप और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स लगाने के लिए पांच कंपनियों की ओर से प्रपोजल मिले हैं। इनमें लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट किया जाएगा। वेदांता और फॉक्सकॉन के संयुक्त उपक्रम, IGSS वेंचर्स और ISMC ने 13.6 अरब डॉलर (लगभग 1.02 लाख करोड़ रुपये) के इनवेस्टमेंट के साथ इलेक्ट्रॉनिक चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की जानकारी दी है। इसके लिए सरकार की इसेंटिव स्कीम के तहत 5.6 अरब डॉलर (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) की मदद मांगी गई है। सरकार 28-45 नैनोमीटर के चिप्स के लिए 40 प्रतिशत और 45-65 नैनोमीटर तक के चिप्स के लिए 30 प्रतिशत तक वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगी। 

वेदांता और  Elest ने मोबाइल फोन्स और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाली डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने में 6.7 अरब डॉलर के इनवेस्टमेंट का प्रपोजल दिया है। इसके लिए इंसेंटिव स्कीम के तहत 2.7 अरब डॉलर की मदद मांगी गई है। केंद्र सरकार चिप डिजाइन और प्रोडक्ट डिजाइन पर भी इंसेंटिव दे रही है। इससे विदेशी कंपनियों की भारत में इस सेगमेंट में यूनिट्स लगाने में दिलचस्पी बढ़ी है।

चंद्रशेखर ने कहा, "पॉलिसीज और नेतृत्व के जरिए देश में टेक्नोलॉजी सेक्टर को आगे बढ़ाया जा रहा है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और आउटसोर्सिंग में मजबूत प्रदर्शन करने का हमारा लंबा इतिहास रहा है। यह स्पष्ट है कि हमारे पास इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM), एम्बेडेड डिजाइन और सेमीकंडक्टर सेगमेंट में अवसरों की कमी नहीं है।" उनका कहना था कि दुनिया की किसी अन्य इकोनॉमी की तुलना में देश में स्टार्टअप्स में यूनिकॉर्न बनने की संख्या सबसे तेज रही है। 




(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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