Developer Options की 5 सेटिंग्स बदलकर Android फोन की स्पीड और परफॉर्मेंस बेहतर करें।
Photo Credit: Unsplash/ Caspar Camille Rubin
अगर आपका Android फोन धीरे-धीरे स्लो होने लगा है, ऐप्स ओपन होने में टाइम ले रहे हैं या स्क्रॉल करते वक्त लैग महसूस होते हैं, तो हर बार नया फोन लेना ही समाधान नहीं होता। कई बार समस्या सिर्फ सेटिंग्स की होती है, जिन्हें सही तरीके से ट्यून करके फोन की परफॉर्मेंस काफी हद तक बेहतर की जा सकती है।
Android में एक hidden सेक्शन होता है, जिसे Developer Options कहते हैं। यहां कुछ एडवांस सेटिंग्स मिलती हैं, जिन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो फोन की स्पीड, स्मूदनेस और ओवरऑल एक्सपीरियंस बेहतर हो सकता है। नीचे हम ऐसी 5 काम की सेटिंग्स बता रहे हैं, जिन्हें ऑन या एडजस्ट करके आप फर्क महसूस कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि ये किसी खास OEM के लिए नहीं, बल्कि सभी Android फोन के लिए काम करता है, क्योंकि इसे Google की तरफ से रूट Android लेयर में शामिल किया गया है।
सबसे पहले अपने फोन में Settings खोलें और About Phone में जाएं। यहां “Build Number” पर 7 बार टैप करें। इसके बाद Developer Options आपके Settings मेन्यू में दिखने लगेगा। इसमें कई सेटिंग्स मौजूद हैं, जिनमें से कई केवल सुपर यूजर्स या डेवलपर्स के लिए काम करती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी हैं, जिनका बेनिफिट आम यूजर भी उठा सकता है। चलिए विस्तार से जानते हैं;
फोन स्लो लगने की एक बड़ी वजह एनिमेशंस होती हैं। यूं तो इनका सॉफ्टवेयर में शामिल होना यूसेज एक्सपीरिएंस को बढ़ाता है, क्योंकि इससे स्क्रोलिंग या ऐप का ओपन/क्लोज/स्विच होना दिखने में अच्छा लगता है, लेकिन ये एंट्री लेवल या बजट फोन में कई बार लैग होने जैसा फील देने का काम करते हैं। इसे बेहतर करने के लिए Animation Scale को कम करना बेहतर होता है।
इसके लिए Developer Options में Window Animation Scale, Transition Animation Scale और Animator Duration Scale ऑप्शन को 1x से घटाकर 0.5x या Off कर दें। इससे ऐप ओपन और क्लोज तेजी से होंगे और फोन ज्यादा फास्ट महसूस होगा।
कई ऐप्स बैकग्राउंड में चलते रहते हैं और RAM यूज करते हैं। इसे फिक्स करने के लिए Developer Options में “Background process limit” ऑप्शन को ढूंढें और इसे कम (जैसे 2 या 3 processes) करें। इससे जितने प्रोसेस सेट हो, बैकग्राउंड में केवल उतने ऐप या प्रोसेस काम करते हैं, बाकी अपने आप किल हो जाते हैं और RAM खाली रहती है। लेकिन ध्यान रखें कि कई बार ऐसे ऐप्स भी बैकग्राउंड में बंद हो सकते हैं, जिन्हें आप कुछ समय के लिए बैकग्राउंड में रखना चाहते हैं, उदाहरण के लिए ब्राउजर ऐस, जिसमें कोई बड़ी फाइल डाउनलोड हो रही हो।
कुछ ऐप्स CPU की बजाय GPU का पूरा इस्तेमाल नहीं करते। “Force GPU rendering” ऑन करने से ग्राफिक्स से जुड़े काम GPU पर शिफ्ट हो जाते हैं, जिससे UI ज्यादा स्मूद हो सकता है। हालांकि, हर फोन में इसका असर अलग हो सकता है। कई फोन इसे बेहतर तरीके से इंप्लिमेंट नहीं कर पाते, तो कई मॉडल्स में नॉर्मल से अधिक हीटिंग की समस्या भी आ सकती है।
यह सेटिंग GPU और CPU के बीच रेंडरिंग को मैनेज करती है। “Disable HW overlays” ऑन करने पर सारा ग्राफिकल काम GPU संभालता है, जिससे कुछ मामलों में लैग कम हो सकता है। लेकिन इससे बैटरी खपत थोड़ी बढ़ सकती है, इसलिए जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें।
कुछ फोन बार-बार WiFi स्कैन करते रहते हैं, जिससे बैटरी और परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है। Developer Options में WiFi scanning से जुड़ी सेटिंग्स को मैनेज करके आप बैटरी बचा सकते हैं और नेटवर्क स्टेबिलिटी बेहतर कर सकते हैं।
ध्यान रखें: Developer Options एडवांस यूजर्स के लिए बनाए गए हैं, इसलिए हर सेटिंग को समझकर ही बदलें। गलत सेटिंग्स से फोन की परफॉर्मेंस पर उल्टा असर भी पड़ सकता है।
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