भारत में स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने के लिए ISRO, Microsoft की पार्टनरशिप

इससे इन स्टार्टअप्स को अपने कारोबार को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी से जुड़े टूल्स और रिसोर्सेज का मुफ्त एक्सेस मिलेगा

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 5 जनवरी 2023 17:29 IST
ख़ास बातें
  • इसके लिए ISRO और ग्लोबल सॉफ्टवेयर कंपनी Microsoft ने एग्रीमेंट किया है
  • इन स्टार्टअप्स को AI और मशीन लर्निंग जैसे रिसोर्सेज मिल सकेंगे
  • ISRO अपने तीसरे मून मिशन को लॉन्‍च करने की तैयारी कर रहा है

इन स्टार्टअप्स को टेक्नोलॉजी, मार्केट से जुड़ी मदद और मेंटरिंग के जरिए मजबूत बनाया जाएगा

देश में स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और ग्लोबल सॉफ्टवेयर कंपनी Microsoft ने गुरुवार को एक एग्रीमेंट किया है। इसके तहत इन स्टार्टअप्स को टेक्नोलॉजी, मार्केट से जुड़ी मदद और मेंटरिंग के जरिए मजबूत बनाया जाएगा। 

Microsoft Future Ready Technology के समिट में हिस्सा लेने के लिए कंपनी के चेयरमैन Satya Nadella पिछले कुछ दिनों से भारत में हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस पार्टनरशिप से देश में उभरते हुए स्पेस टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स और आंत्रप्रेन्योर्स को आगे बढ़ाने की ISRO की योजना में मदद मिलेगी। इससे इन स्टार्टअप्स को अपने कारोबार को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी से जुड़े टूल्स और रिसोर्सेज का मुफ्त एक्सेस मिलेगा। ISRO के चेयरमैन S Somanath ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के साथ पार्टनरशिप से स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को सैटेलाइट डेटा के एनालिसिस और प्रोसेसिंग में मदद मिलेगी और वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे रिसोर्सेज का इस्तेमाल कर सकेंगे। 

टेक्नोलॉजी के एक्सेस के अलावा माइक्रोसॉफ्ट की ओर से स्पेस इंजीनियरिंग से लेकर क्लाउड टेक्नोलॉजीज, प्रोडक्ट और डिजाइन, फंड जुटाने और मार्केटिंग के लिए इन स्टार्टअप्स को मदद उपलब्ध कराई जाएगी। पिछले वर्ष ISRO की कमर्शियल यूनिट न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से OneWeb के 36 ब्रॉडबैंड सैटेलाइट्स का सफल लॉन्च किया था। लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कम्युनिकेशंस फर्म OneWeb में भारती ग्लोबल सबसे बड़ी इनवेस्टर है। 

यह ISRO और NSIL के लिए बड़े कमर्शियल ऑर्डर्स में से एक था। यह ऐसा पहला ऑर्डर था जिसमें LVM3 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया है। OneWeb ने बताया है कि वह अगले वर्ष तक पूरे देश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। पूरी तरह स्वदेशी टेक्नोलॉजी से बनाया गया LVM3 रॉकेट अभी तक चार सफल मिशन में शामिल रहा है। इनमें महत्वपूर्ण चंद्रयान-2 मिशन शामिल है। ISRO अपने तीसरे मून मिशन को लॉन्‍च करने की तैयारी कर रहा है। इस वर्ष जून में चंद्रयान-3 को लॉन्‍च किया जाएगा। यह चंद्रमा की सतह पर खोज को लेकर एक महत्‍वपूर्ण अभियान है। चंद्रयान-3 के लिए जिस रोवर को तैयार किया गया है, वह यात्रा की ऊंचाई को बेहतर तरीके से कैलकुलेट कर सकता है और ऐसी जगहों से खुद को बचा सकता है, जहां खतरा हो सकता है। 


 
 

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