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पोर्न ऐप के नाम पर साइबर ठगी, पैसों की लूट, Facebook ऐड से डाउनलोड हो रहे APK फाइल, I4C ने दी चेतावनी

NCTAU ने पोर्नोग्राफी ऐप्स के नाम पर स्कैम करने वाले खतरनाक एंड्रॉयड ऐप्स से होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड को लेकर चेतावनी दी है।

पोर्न ऐप के नाम पर साइबर ठगी, पैसों की लूट, Facebook ऐड से डाउनलोड हो रहे APK फाइल, I4C ने दी चेतावनी

Photo Credit: Pexels/Tima Miroshnichenko

सोशल मीडिया के जरिए फ्रॉड की शुरुआत होती है।

ख़ास बातें
  • सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए पोर्न ऐप को फैलाया जाता है।
  • फिशिंग वेबसाइट्स पर रीडायरेक्ट किया जाता है।
  • फ्रॉड में सबसे आखिर में बिना मंजूरी के वित्तीय लेनदेन किए जाते हैं।
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इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने पोर्नोग्राफी ऐप्स के नाम पर स्कैम करने वाले खतरनाक एंड्रॉयड ऐप्स से होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड को लेकर चेतावनी दी है। गृह मंत्रालय की ओर से I4C के तहत 26 अगस्त को जारी एक एडवाइजरी में बताया गया है कि इन ऐप्स का प्रमोशन फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एडवरटाइजमेंट के जरिए किया जा रहा है। इनके नाम Night Play, Reloop, Kyss, Vimo, Rivo, Nexo और Vixa हैं और इनके कुछ दूसरे वर्जन भी हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

एडवाइजरी में कहा गया है कि ये एडवरटाइजमेंट यूजर्स को पोर्नोग्राफिक कंटेंट वाली वेबसाइट्स पर रीडायरेक्ट करते हैं, जहां उन्हें गूगल प्ले स्टोर के बाहर से एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए राजी किया जाता है।

कैसे होता है फ्रॉड

  • फोन में जब ऐप इंस्टॉल हो जाता है तो उसके बाद ये ऐप्स एक्सेसिबिलिटी और दूसरी जरूरी परमिशन मांगते हैं।
  • परमिशन मिलने से साइबर फ्रॉड डिवाइस का कंट्रोल ले सकते हैं और बैकग्राउंड में मैलवेयर रन कर सकते हैं।
  • उसके बाद ऐप अपडेट के नाम पर एक दूसरा पैकेज भी डाउनलोड किया जा सकता है।
  • शुरुआत में दी गई परमिशन का गलत उपयोग करके मैलवेयर डिवाइस का कंट्रोल अपने हाथ में ले सकता है।
  • इससे बिना इजाजत के पैसे का लेन-देन करवाया जा सकता है।
  • वहीं कई ऐप्स तो फोन पर VPN भी इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे इंटरनेट ट्रैफिक फ्रॉड के कंट्रोल वाले सर्वर से होकर गुजरता है।
  • यह एक प्रकार से यूजर्स का डेटा खतरे में डाल सकता है और गलत या आपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
  • मैलवेयर यूजर्स को सामान्य डिवाइस सेटिंग्स के जरिए ऐप अनइंस्टॉल करने से भी रोक सकता है।

फ्रॉड में क्या क्या होता है?

  • सोशल मीडिया ऐड्स के जरिए फैलाया जाता है।
  • फिशिंग वेबसाइट्स पर रीडायरेक्ट किया जाता है।
  • ऐप अपडेट के तौर पर दूसरा पैकेज डाउनलोड होता है।
  • फोन का कंट्रोल लेने के लिए एक्सेसिबिलिटी परमिशन का गलत इस्तेमाल होता है।
  • फोन पर VPN इंस्टॉल करवाया जाता है।
  • सबसे आखिर में बिना मंजूरी के वित्तीय लेनदेन किए जाते हैं।

कैसे करें बचाव
NCTAU ने यूजर्स को सलाह दी है कि सिर्फ गूगल प्ले स्टोर या अन्य भरोसेमंद ऐप स्टोर के जरिए ही ऐप्स डाउनलोड करना चाहिए। इसके अलावा विज्ञापन, वेबसाइट्स या संदिग्ध लिंक से मिली APK फाइल से दूर रहना चाहिए। यूजर्स को अनजान ऐप्स को एक्सेसिबिलिटी परमिशन देने से बचना चाहिए। हमेशा इंस्टॉल किए गए ऐप्स की लगातार चेक करना चाहिए और जो खुद से डाउनलोड नहीं की हैं तो उन्हें डिलीट करना चाहिए। इसके अलावा गूगल प्ले प्रोटेक्ट को चालू रखने, एंड्रॉयड डिवाइस को अपडेट करने और संदिग्ध गतिविधियों के लिए बैंक अकाउंट और यूपीआई ट्रांजेक्शन को नियमित तौर पर चेक करते रहना चाहिए।

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ये भी पढ़े: Porn App, Cyber Fraud, Cybercrime, Ministry of Home Affairs, I4C
साजन चौहान

साजन चौहान Gadgets 360 में सीनियर सब एडिटर हैं। उन्हें विभिन्न प्रमुख ...और भी

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