Amazon ने 5,105 नए LEO सैटेलाइट लॉन्च करने की मंजूरी मांगी है। कंपनी Direct-to-Device (D2D) तकनीक के जरिए सीधे स्मार्टफोन तक इंटरनेट और कनेक्टिविटी पहुंचाने की तैयारी कर रही है। जानें इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है।
Amazon Leo के जरिए Direct-to-Phone सैटेलाइट नेटवर्क की तैयारी कर रही है कंपनी
Photo Credit: Amazon
सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में SpaceX की Starlink को चुनौती देने के लिए Amazon ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अमेरिकी नियामक संस्था FCC से 5,105 नए लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट लॉन्च करने की मंजूरी मांगी है। इन सैटेलाइट्स का मकसद सिर्फ ब्रॉडबैंड इंटरनेट देना नहीं होगा, बल्कि सीधे स्मार्टफोन तक वॉयस कॉल, मैसेजिंग, डेटा और इमरजेंसी कनेक्टिविटी जैसी Direct-to-Device (D2D) सेवाएं पहुंचाना भी होगा। Amazon का लक्ष्य 2028 से इस नेटवर्क की तैनाती शुरू करना है।
Amazon की यह नई पहल उसके सैटेलाइट बिजनेस Amazon Leo का हिस्सा है। पहले इसे Project Kuiper के नाम से जाना जाता था और इसका फोकस सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट था। अब कंपनी इस प्लेटफॉर्म का विस्तार कर Direct-to-Phone कनेक्टिविटी वाले बाजार में भी उतरना चाहती है, जहां पहले से SpaceX की Starlink, AST SpaceMobile और Lynk Global जैसी कंपनियां एक्टिव हैं।
CNBC के मुताबिक, FCC में दायर आवेदन कहता है कि Amazon 5,105 नए LEO सैटेलाइट्स का एक अलग नेटवर्क तैयार करना चाहता है। कंपनी का कहना है कि यह नेटवर्क मोबाइल ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि जिन इलाकों में पारंपरिक मोबाइल टावरों का नेटवर्क नहीं पहुंचता, वहां भी स्मार्टफोन को कनेक्टिविटी मिल सके। इसके लिए Amazon Globalstar के सैटेलाइट स्पेक्ट्रम और इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
Direct-to-Device (D2D) तकनीक में मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होता है। यानी अगर किसी इलाके में मोबाइल टावर उपलब्ध नहीं हैं, तब भी यूजर मैसेज भेज सकता है, इमरजेंसी सेवाओं का यूज कर सकता है और भविष्य में वॉयस कॉल व सीमित डेटा सर्विसेज भी हासिल कर सकता है। इस तकनीक को दूरदराज के इलाकों, समुद्री क्षेत्रों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान कम्युनिकेशन बनाए रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Amazon का यह कदम ऐसे समय आया है जब Starlink पहले से सैटेलाइट इंटरनेट और Direct-to-Cell सेवाओं पर तेजी से काम कर रही है। Starlink ने अमेरिका में T-Mobile के साथ साझेदारी की है, जबकि Amazon भी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के साथ मिलकर अपनी सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में सैटेलाइट आधारित मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में दोनों कंपनियों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
फिलहाल Amazon ने भारत में Amazon Leo या उसकी Direct-to-Device सेवा लॉन्च करने की कोई समयसीमा घोषित नहीं की है। यदि कंपनी भविष्य में भारतीय बाजार में उतरना चाहती है तो उसे भारत सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटर्स से जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी।
वहीं भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का बाजार अभी शुरुआती दौर में है। Starlink को भारत में आवश्यक लाइसेंस मिल चुके हैं, लेकिन उसकी कर्मशियल सर्विसेज अभी बड़े स्तर पर शुरू नहीं हुई हैं। स्पेक्ट्रम आवंटन, कीमत और रोलआउट से जुड़े कई पहलुओं पर काम जारी है। इसके अलावा Bharti Airtel, Eutelsat OneWeb के जरिए सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं पर काम कर रही है, जबकि Reliance Jio भी SES के साथ साझेदारी में इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।
ऐसे में भले ही Amazon Leo की सेवा भारत में आने में अभी समय लगे, लेकिन अगर कंपनी यहां एंटर करती है तो भारतीय बाजार में Starlink, Amazon Leo, OneWeb और Jio समर्थित सैटेलाइट सर्विसेज के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। इससे दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी के नए ऑप्शन खुलने की संभावना बढ़ेगी।
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