Crypto से ‘कमाई’ के चक्‍कर में स्‍कैम वेबसाइटों पर पहुंच रहे भारतीय निवेशक

2021 में फेक क्रिप्टो वेबसाइटों ने भारत से 96 लाख विजिट दर्ज कीं।

Crypto से ‘कमाई’ के चक्‍कर में स्‍कैम वेबसाइटों पर पहुंच रहे भारतीय निवेशक

Photo Credit: Reuters

हालांकि 2020 के मुकाबले फेक क्रिप्टो वेबसाइटों पर जाने वाले भारतीयों की संख्या में काफी गिरावट आई है।

ख़ास बातें
  • क्रिमि‍नल्‍स द्वारा निवेशकों को ठगने के मामले दुनिया भर में बढ़े हैं
  • कई वेबसाइटें विजिटर्स को बताए बिना उनकी पर्सनल इन्‍फर्मेशन जुटाती हैं
  • कुछ स्कैम वेबसाइटें तो निवेशकों को फेक प्‍लान्‍स भी बताती हैं
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साल 2021 में भारत समेत दुनिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर क्रिप्टोकरेंसी ने अपनी छाप छोड़ी। भारत सरकार क्रिप्‍टोकरेंसी को लेकर भले ही अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है, लेकिन अनुमान है कि देश में 10 करोड़ लोग क्रिप्‍टोकरेंसी के साथ प्रयोग कर रहे हैं। अब Chainalysis की एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि
रिसर्च और जागरूकता की कमी के चलते कई क्रिप्टो-पसंद भारतीय, स्कैम वेबसाइटों पर जा रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2021 में फेक क्रिप्टो वेबसाइटों ने भारत से 96 लाख विजिट दर्ज कीं।

क्रिप्टो स्पेस में उछाल के साथ-साथ साइबर क्रिमि‍नल्‍स द्वारा निर्दोष निवेशकों को ठगने के मामले दुनिया भर में बढ़े हैं। 2021 में भारतीयों ने जिन टॉप पांच स्कैम क्रिप्टो वेबसाइटों की व‍िजिट की, उनमें  Coinpayu.com, Adbtc.top, Hackertyper.net, Dualmine.com और Coingain.app शामिल हैं। Chainalysis के डेटा के हवाले से Mint ने यह जानकारी अपनी एक रिपोर्ट में दी है।  

रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कई वेबसाइटें विजिटर्स को बताए बिना उनकी पर्सनल इन्‍फर्मेशन को इकट्ठा करने के लिए बनाई गई हैं। लोगों की अहम डिटेल्‍स के साथ-साथ उनके नाम, ई-मेल और फोन नंबर भी ये वेबसाइटें जुटाती हैं। पर्सनल इन्‍फर्मेशन की मदद से क्रिप्‍टो निवेशकों के साथ घोटालों को अंजाम देने की कोशिश होती है। कुछ स्कैम वेबसाइटें तो क्रिप्टो निवेशकों को फेक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स भी बताती हैं। 

उदाहरण के लिए- इस महीने की शुरुआत में केरल में एक क्रिप्टोकरेंसी घोटाले का पता चला था। इसमें करीब 900 लोगों के साथ लगभग 1200 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। कहा जाता है कि केरल के ही एक शख्‍स ने लोगों को ‘मॉरिस कॉइन' नाम की क्रिप्‍टोकरेंसी में निवेश का लालच दिया। हकीकत में यह क्रिप्‍टोकरेंसी थी ही नहीं। 

इसके अलावा, लोगों से संपर्क करने के लिए स्‍कैमर्स वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे ऐप्‍स का इस्‍तेमाल भी करते हैं। पिछले साल नवंबर में Shiba Inu के ऑफ‍िशियल ट्विटर अकाउंट ने निवेशकों को टेलीग्राम प्‍लेटफॉर्म के जरिए की जा रही धोखाधड़ी के बारे में अलर्ट किया था। 

हालांकि Chainalysis की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 के मुकाबले फेक क्रिप्टो वेबसाइटों पर जाने वाले भारतीयों की संख्या में काफी गिरावट आई है। दो साल पहले भारतीयों ने क्रिप्टो स्कैम वेबसाइटों को 1 करोड़ 78 लाख बार विजिट किया था। 

 
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