आजकल कई बच्चे App Hider और Vault जैसे ऐप्स इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी हो जाता है कि फोन में छिपे ऐप्स की पहचान कैसे की जाए और डिजिटल सुरक्षा व प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
Photo Credit: Unsplash/ Franck
स्मार्टफोन आज बच्चों की पढ़ाई, एंटरटेनमेंट और सोशल लाइफ का बड़ा हिस्सा बन चुका है। लेकिन इंटरनेट की दुनिया जितनी आसान दिखती है, उतनी ही जोखिम भरी भी हो सकती है। कई बार बच्चे मजाक, प्राइवेसी या "सीक्रेट स्पेस" बनाने के लिए ऐसे ऐप्स इस्तेमाल करने लगते हैं जो फोन में छिपे रहते हैं। इनमें App Hider, Vault या Fake Calculator जैसे ऐप्स शामिल हो सकते हैं। समस्या सिर्फ ऐप छिपाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई बार ऐसे ऐप्स बच्चों को असुरक्षित कंटेंट, साइबर बुलिंग या ऑनलाइन फ्रॉड जैसी चीजों के करीब भी ले जा सकते हैं।
हालांकि यहां सबसे जरूरी बात यह है कि डिजिटल पेरेंटिंग का मतलब बच्चों की जासूसी करना नहीं होना चाहिए। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि माता-पिता को 'मेंटोर' की भूमिका निभानी चाहिए, न कि 'पुलिस' की। बच्चों की सुरक्षा और उनकी प्राइवेसी के बीच सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में कुछ बेसिक टेक्निकल चीजें समझकर आप यह जरूर जान सकते हैं कि बच्चे के फोन में कुछ संदिग्ध तो नहीं चल रहा।
कई बार ऐप होम स्क्रीन से गायब हो जाता है, लेकिन फोन से पूरी तरह नहीं हटता। ऐसे में फोन की App List काफी मदद कर सकती है।
Android यूजर्स:
iPhone यूजर्स:
आजकल कई ऐसे ऐप्स मौजूद हैं जो ऊपर से Calculator, Gallery या Torch जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में फोटो, वीडियो और दूसरे ऐप्स छिपाने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
अगर किसी ऐप पर शक हो तो:
कुछ Hidden Apps बैकग्राउंड में लगातार चलते रहते हैं। ऐसे में वे ज्यादा बैटरी खर्च कर सकते हैं।
चेक करने का तरीका:
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों के फोन को चुपके से चेक करना हमेशा सही तरीका नहीं होता। अगर माता-पिता पहले से खुलकर बात करें, तो बच्चे ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।
ध्यान रखने वाली बातें:
Official Parental Control Tools ज्यादा बेहतर ऑप्शन। WhatsApp, Instagram, Facebook, Snapchat जैसे सभी पॉपुलर ऐप्स माता-पिता के लिए कुछ एक्स्ट्रा कंट्रोल्स देते हैं। उनका यूज करना सीखें।
कुछ पॉपुलर टूल्स:
इनकी मदद से:
डिजिटल सुरक्षा सिर्फ ऐप्स और सेटिंग्स तक सीमित नहीं है। बच्चों को साइबर सुरक्षा, फेक न्यूज, ऑनलाइन फ्रॉड और अजनबियों के खतरों के बारे में समझाना भी उतना ही जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि बच्चे को यह भरोसा होना चाहिए कि अगर ऑनलाइन उससे कोई गलती हो जाए, तो वह बिना डरे अपने माता-पिता से बात कर सकता है।
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