50 OTT प्लेटफॉर्म्स पर भारत सरकार का एक्शन, अश्लील कंटेंट के चलते बैन

केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्षों में भारत में 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है। सरकार के मुताबिक इन प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था, जो IT Act समेत कई कानूनों का उल्लंघन करता था।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 23 जुलाई 2026 16:27 IST
ख़ास बातें
  • सरकार ने 2 साल में 50 OTT प्लेटफॉर्म्स की सार्वजनिक पहुंच पर रोक लगाई
  • अश्लील कंटेंट और IT Act के उल्लंघन को कार्रवाई की वजह बताया गया
  • नए IT Rules के तहत गैरकानूनी कंटेंट 3 घंटे में हटाना अनिवार्य होगा

Photo Credit: Xiaomi

केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्षों में 50 OTT प्लेटफॉर्म को भारत में सार्वजनिक रूप से एक्सेस करने से रोक दिया है। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था, जो सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम समेत अन्य कानूनों का उल्लंघन करता था। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में एक लिखित जवाब के दौरान दी।

सांसद संबित पात्रा के सवाल के जवाब में अश्विनी वैष्णव ने बताया (via Fortune India) कि इन OTT प्लेटफॉर्म्स पर IT Act की धारा 67 और 67A, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 और महिलाओं के अशोभनीय प्रतिनिधित्व (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 4 का उल्लंघन करने वाला कंटेंट पाया गया था। इसी आधार पर सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स की सार्वजनिक पहुंच बंद करने की कार्रवाई की।

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एक अन्य लिखित जवाब में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने बताया कि सरकार ने IT Rules लागू किए हैं। इन नियमों के तहत डिजिटल मीडिया के करंट अफेयर्स पब्लिशर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि IT Act की धारा 79(3)(b) सरकार को यह अधिकार देती है कि वह इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को गैरकानूनी कंटेंट हटाने या उसकी पहुंच रोकने का निर्देश दे सके।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि IT Rules में हाल ही में किए गए संशोधनों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य इंटरमीडियरी को अदालत के आदेश या सरकार और उसकी अधिकृत एजेंसी की सूचना मिलने के तीन घंटे के भीतर गैरकानूनी कंटेंट हटाना या उसकी पहुंच रोकना अनिवार्य होगा।

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सरकार ने बताया कि Digital Personal Data Protection Act डिजिटल पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग को कंट्रोल करने और बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए कानूनी स्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है। वहीं Promotion and Regulation of Online Gaming Act युवाओं में डिजिटल लत और ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले आर्थिक नुकसान जैसी समस्याओं से निपटने के उद्देश्य से लाया गया है।

 

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