अमेरिका में स्टडी के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स और एक्सचेंज विजिटर्स को वीजा देने से पहले उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहले से स्क्रूटनी की जा रही है। स्क्रूटनी के इस दायरे में स्टेट डिपार्टमेंट ने H-1B और H-4 वीजा आवेदकों को भी शामिल किया है। अमेरिका के वीजा के सभी आवेदकों को उनके सभी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर प्राइवेसी सेटिंग्स को एडजस्ट कर 'पब्लिक' करने का निर्देश दिया गया है।
Karnataka State IT/ITES Union (KITU) के जनरल सेक्रेटरी, Suhas Adiga ने बताया कि यूनियन ने TCS के खिलाफ कर्नाटक के एडिशनल कमिश्नर ऑफ लेबर के पास इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट का एक मामला दर्ज कराया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है। TCS ने इन आरोपों को गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि छंटनी का असर उसकी वर्कफोर्स के दो प्रतिशत तक सीमित है।
इस आरोप की US Equal Employment Opportunity Commission (EEOC) ने जांच शुरू की है। भेदभाव का आरोप लगाने वाले अधिकतर पूर्व वर्कर्स 40 वर्ष की आयु से अधिक और गैर दक्षिण एशियाई मूल के हैं। इनका कहना है कि TCS ने उनकी छंटनी की थी लेकिन उनके भारतीय सहकर्मियों का पक्ष लिया था। भारतीय वर्कर्स में से कुछ H-1B वीजा पर कार्य कर रहे थे।
भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा मार्केट है। TCS के पूर्व वर्कर Anil Kini ने आरोप लगाया था कि कंपनी अमेरिका में अधिक वर्कर्स को भेजने के लिए वीजा की जरूरत को लेकर गलत जानकारी देती है। Kini ने कहा था कि TCS लॉटरी सिस्टम के जरिए अधिक वीजा हासिल करने के लिए अपनी पोजिशंस से अधिक पेटिशंस दाखिल करती है।
हाल ही में TCS ने वेरिएबल पे से जुड़ी पॉलिसी को अपडेट कर इसमें ऑफिस से वर्क को महत्वपूर्ण बनाया है। इसमें वर्कर्स की वेरिएबल पे को तय करने के लिए चार अटेंडेंस स्लैब बनाए गए हैं
नई पॉलिसी के तहत, एक तिमाही में 60 प्रतिशत से कम ऑफिस आने वालों को उस तिमाही के लिए कोई वेरिएबल पे नहीं मिलेगी। TCS के ऑफिस में 60-75 प्रतिशत अटेंडेंस वाले वर्कर्स को वेरिएबल पे का 50 प्रतिशत मिलेगा