एलियंस से क्यों नहीं हो रहा संपर्क? वैज्ञानिकों ने बताया

मिल्की वे आकाशगंगा लगभग 10 अरब वर्ष पुरानी है और इसमें 100 अरब से अधिक तारे मौजूद हैं।

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Written by हेमन्त कुमार, अपडेटेड: 19 अप्रैल 2025 21:18 IST
ख़ास बातें
  • वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन मौजूद हो सकता है।
  • अकेले हमारी आकाशगंगा में ही रहने लायक ग्रहों की संख्या बहुत ज्यादा है।
  • एक्सोप्लेनेट K2-18 b पर कुछ गैसों के कैमिकल फिंगरप्रिंट मिले हैं।

बहुत से अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन मौजूद हो सकता है।

बहुत से अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन मौजूद हो सकता है। हाल ही में एक एक्सोप्लेनेट पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी गैसें खोजी हैं जो किसी जैविक प्रक्रिया के दौरान ही बनती हैं। और ये गैसे पृथ्वी पर भी बनती हैं। इससे पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना पहले से ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन इसके साथ ही एक सवाल और भी उठता है कि अगर वाकई में पृथ्वी के बाहर किसी ग्रह पर प्राणी या एलियंस मौजूद हैं तो अब तक हमारे संपर्क में क्यों नहीं आए? वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। 

1950 में एनरिको फर्मी (Enrico Fermi) ने दोपहर के भोजन के दौरान एडवर्ड टैलर (Edward Teller) सहित अन्य प्रसिद्ध भौतिकविदों से यह सवाल किया था, ''सब लोग कहां हैं?" इस दुविधा को 'फर्मी का विरोधाभास' (Fermi's Paradox) नाम दिया गया। पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस सेंटर के डायरेक्टर जेसन राइट ने AFP को बताया कि "यह संख्या का खेल है।" मिल्की वे आकाशगंगा लगभग 10 अरब वर्ष पुरानी है और इसमें 100 अरब से अधिक तारे मौजूद हैं। इससे पता चलता है कि अकेले हमारी आकाशगंगा में ही रहने लायक ग्रहों की संख्या बहुत ज्यादा है।
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K2-18b भी इसमें शामिल है जिसके बारे में गुरूवार को वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है। एक्सोप्लेनेट K2-18 b पर कुछ गैसों के कैमिकल फिंगरप्रिंट मिले हैं। जिन गैसों के निशान वहां पर मिले हैं, वे गैसें पृथ्वी पर केवल किसी जैविक प्रक्रिया के दौरान ही बनती हैं। इन गैसों के नाम- डीमिथाइल सल्फाइड, या DMS, और डीमिथाइल डाईसल्फाइड, या DMDS हैं। ये गैसें पृथ्वी पर जीवित प्राणियों द्वारा बनाई जाती हैं, मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवियों द्वारा। जिसमें समुद्री फाइटोप्लांकटन - शैवाल शामिल हैं। इस खोज को लेकर शोधकर्ताओं ने कहा कि इससे पता चलता है कि ग्रह सूक्ष्मजीवीय जीवन से भरा हुआ हो सकता है। 

तो एलियंस से अब तक संपर्क क्यों नहीं हुआ? 2015 की एक पुस्तक के अनुसार, 'फर्मी के विरोधाभास' के लिए अबतक 75 काल्पनिक समाधान प्रस्तावित किए गए हैं, या उससे भी ज्यादा। 
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हम ब्रह्मांड में बिल्कुल अकेले हैं? 
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सबसे पहली संभावना कहती है कि एलियंस से संपर्क इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि वे मौजूद ही नहीं हैं। यानी हम इस ब्रह्मांड में बिल्कुल अकेले ही हैं। लेकिन बहुत से वैज्ञानिक इससे सहमत नहीं है। 

Nature Astronomy द्वारा सर्वे में शामिल संबंधित विषयों के 1000 वैज्ञानिकों में से 87% का मानना है कि कम से कम पृथ्वी के बाहर जीवन का एक आधारभूत रूप अवश्य ही मौजूद है। 67% का मानना है कि एलियंस बाहर मौजूद हैं, और वे कहीं ज्यादा इंटेलिजेंट हैं। 
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ग्रेट फिल्टर
एक अन्य थ्योरी कहती है कि जरूर कोई एक बड़ा फिल्टर यूनिवर्स में है जो जीवन को दूर ही कहीं रोके हुए है। या शायद कोई ऐसी बाधा है जो सभ्यताओं को एक निश्चित बिंदु से आगे बढ़ने से रोके हुए है। 
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क्या हम एक zoo में हैं? 
'चिड़ियाघर परिकल्पना' (zoo hypothesis) के तहत, तकनीकी रूप से एडवांस्ड एलियंस मनुष्यों को अकेला छोड़ देंगे और हमें दूर से ही देखेंगे, जैसे चिड़ियाघर के जानवर करते हैं।

ब्रह्मांड है घना काला जंगल?
यह थ्योरी कहती है कि ब्रह्मांड एक घना काला जंगल है जहां पर कोई भी अपनी पहचान नहीं बताना चाहता है। अगर वे ऐसा करते हैं तो कोई दूसरा आकर उन्हें खत्म कर देगा। 

कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि एलियंस सभी प्रकार की अज्ञात टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके मैसेज भेज सकते हैं, इसलिए हो सकता है कि आकाशगंगा उतनी शांत न हो जितनी हम सोचते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो एलियंस एक रहस्य हैं। वैज्ञानिक लगातार कोशिश कर रहे हैं कि पृथ्वी के बाहर से आने वाले किसी सिग्नल को डीकोड किया जा सके। कोई ऐसा उपकरण हो जो बाहर से आने वाले सिग्नल को पकड़ सके। 
 

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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी

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