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सूर्य में हुआ जोरदार विस्‍फोट, एक घंटे तक निकलीं विनाशकारी लपटें, जानें पृथ्‍वी पर होगा क्‍या असर

खास बात यह है कि 30 अप्रैल को आशिंक सूर्य ग्रहण से पहले सूर्य में यह हलचल देखी गई।

सूर्य में हुआ जोरदार विस्‍फोट, एक घंटे तक निकलीं विनाशकारी लपटें, जानें पृथ्‍वी पर होगा क्‍या असर

सूर्य में हुए विस्‍फोट में एक तेज कोरोनल मास इजेक्शन हुआ। हालांकि पृथ्‍वी पर इसका बहुत ज्‍यादा असर होने की उम्‍मीद नहीं है।

ख़ास बातें
  • यह एक्‍स क्‍लास का सौर तूफान था
  • इसे सूर्य पर सबसे ताकतवर विस्‍फोट के रूप में माना जाता है
  • 30 अप्रैल को आशिंक सूर्य ग्रहण से पहले सूर्य में यह हलचल हुई
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सर्यू में होने वालीं घटनाएं वैज्ञानिकों को आश्‍चर्यचक‍ित करती हैं। उनमें जिज्ञासा जगाती हैं। ऐसा ही एक घटनाक्रम 30 अप्रैल को हुआ। सूर्य पर मौजूद एक एक्टिव सनस्‍पॉट AR2994 अपने एक्टिव रीजन 2994 में बहुत तेजी से भड़कने लगा। यह एक्‍स क्‍लास का सौर तूफान था, जिसे सूर्य पर सबसे ताकतवर विस्‍फोट के रूप में माना जाता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इसका आश्चर्यजनक वीडियो रिकॉर्ड किया है। 

खगोलविद टोनी फिलिप्स ने अपनी वेबसाइट Spaceweather.com पर बताया है कि सूर्य से निकलने वालीं ये लपटें करीब एक घंटे तक जारी रहीं। इस विस्‍फोट ने मध्‍य अटलांटिक महासागर और यूरोप के ज्‍यादातर हिस्‍सों में शॉर्टवेव रेडियो ब्‍लैकआउट के लिए काफी रेडिएशन पैदा किया।  

खास बात यह है कि 30 अप्रैल को आशिंक सूर्य ग्रहण से पहले सूर्य में यह हलचल देखी गई। बताया जाता है कि सौर तूफान ईस्‍टर्न डेलाइट टाइम के अनुसार, सुबह 9:37 बजे से शुरू हुआ और 10 मिनट बाद यह अपने पीक पर पहुंच गया। टोनी फिलिप्स ने बताया है कि सूर्य में हुए विस्‍फोट में एक तेज कोरोनल मास इजेक्शन हुआ। हालांकि पृथ्‍वी पर इसका बहुत ज्‍यादा असर होने की उम्‍मीद नहीं है। 

सूर्य से निकलने वाले सौर तूफानों को उनकी तीव्रता के हिसाब से क्‍लासिफाई किया जाता है। इससे वैज्ञानिक तय कर पाते हैं कि सौर तूफान कितना गंभीर है। सबसे कमजोर सौर तूफान- ए-क्लास, बी-क्लास और सी-क्लास में आते हैं। एम-क्लास के तूफान सबसे ताकतवर होते हैं और इनके हमारी पृथ्‍वी से टकराने की संभावना बनी रहती है। 

एक्स-क्लास के सोलर फ्लेयर्स की वजह से सूर्य में विस्‍फोट होते हैं। जब इनका टार्गेट पृथ्‍वी की तरफ होता है, तो इसकी वजह से सैटेलाइट्स और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ये विस्‍फोट बिजली स्टेशनों और रेडियो सिग्‍नलों को भी प्रभावित कर सकते हैं। 

सूर्य की स्‍पेस वेदर साइकिल 11 साल की है। मौजूदा सौर चक्र को सौर चक्र 25 के रूप में जाना जाता है। यह 2019 में शुरू हुआ। इसकी निगरानी नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी, यूएस-यूरोपियन सोलर एंड हेलिओस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी (SOHO) और दूसरे अंतरिक्ष यान द्वारा की जा रही है। इनका मकसद सूर्य में होने वाली हलचलों को जानना है ताकि किसी संकट की स्थिति में उससे निपटा जा सके। 
 
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ये भी पढ़े: Sun, Solar flares, solar flare, NASA, Solar Eclips

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