इंसान कब से दो पैरों पर चल रहा? नई स्‍टडी में हुआ खुलासा

इंसान के विकास का यह एक अहम बिंदु है। शायद इसीलिए वैज्ञानिक सटीक तौर पर उस समय का अनुमान लगाना चाहते हैं।

इंसान कब से दो पैरों पर चल रहा? नई स्‍टडी में हुआ खुलासा

वैज्ञानिकों ने इंसान की बेहद शुरुआती प्रजा‍ति सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस (Sahelanthropus tchadensis) के अगले हिस्‍से और जांघ के जीवाश्म की जांच की।

ख़ास बातें
  • वैज्ञानिकों ने इंसान की बेहद शुरुआती प्रजा‍ति के जीवाश्‍म को जांचा
  • सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस के जीवाश्‍म की जांच की गई
  • ये जीवाश्‍म साल 2001 में चाड में पाए गए थे
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इंसान दो पैरों पर चलता है, लेकिन लाखों साल पहले ऐसा नहीं था। इंसान चार पैरों पर चलते हुए विकसित हुआ और धीरे-धीरे उसने दो पैरों पर चलना सीखा। एक नई स्‍टडी में अनुमान लगाया गया है कि करीब 70 लाख साल पहले इंसान चार के बजाए दो पैरों पर चलने के अनुकूल हुआ। इंसान के विकास का यह एक अहम बिंदु है। शायद इसीलिए वैज्ञानिक सटीक तौर पर उस समय का अनुमान लगाना चाहते हैं। स्‍टडी के दौरान वैज्ञानिकों ने इंसान की बेहद शुरुआती प्रजा‍ति सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस (Sahelanthropus tchadensis) के अगले हिस्‍से और जांघ के जीवाश्म की जांच की। ये जीवाश्‍म साल 2001 में चाड के टोरोस-मेनला रीजन में पाए गए थे। 

स्‍टडी के अनुसार, यह भी मुमकिन है कि ये शुरुआती होमिनिन (hominins) सभी चार अंगों का इस्‍तेमाल करते हुए ऊपर चढ़ने लगे हों और धीरे-धीरे चार में से दो अंगों का इस्‍तेमाल करना सीखा हो। रिसर्चर्स ने सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस के लोकोमोटर बिहेवियर के पोस्टक्रैनियल सबूतों का खुलासा किया। इससे शुरुआती मानव विकास के बारे में समझ मिलती है। 
रिसर्चर्स यह तय करने में सक्षम थे कि सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस किस तरह से डेवलप हुआ। उन्‍होंने उसकी जीवाश्म हड्डियों की 20 अलग-अलग विशेषताओं का इस्‍तेमाल यह तय करने के लिए किया कि सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस दो पैरों पर चलते थे या चार।  वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इस प्रजाति ने मौजूदा गोरिल्ला और चिंपांजी की तरह अपनी उंगली और पैर की हड्डियों पर वापस झुकने के बजाए पेड़ों पर चढ़ने के लिए ठोस हाथ की पकड़ को इस्‍तेमाल किया।  

यह जांच एक खोपड़ी वाले जीवाश्म पर पहले हुए शोध पर आगे बढ़ी, जिसे सहेलएंथ्रोपस चडेन्सिस माना जाता है। इसे भी चाड के टोरोस-मेनला रीजन में खोजा गया था। अब इस बात के और ज्‍यादा सबूत हैं कि बंदरों जैसी ये प्रजातियां दो पैरों वाली थीं। ये जीवाश्म उस समय से जुड़े हैं, जिस वक्‍त को लेकर काफी विवाद रहा है। कहा जाता है कि इसी समय के दौरान यानी 60 से 80 लाख साल पहले इंसान आनुवंशिक रूप से चिंपैंजी और बोनोबोस से अलग हो गए थे। शुरुआती होमिनिन के बारे में कहा जाता है कि वो घास के मैदानों, ताड़ के पेड़ों और जंगलों में रहते थे। भोजन और पानी की तलाश में उनके पास पेड़ों में चढ़ने के लिए दो पैरों का विकल्‍प था।
 

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