चीन ने किया अमेरिका को टेंशन देने वाला काम! यह है अगले 10 साल की तैयारी

इस बीच चीन ने कहा है कि उसने अपने Chang’e-5 मिशन से मिले सैंपल्‍स के जरिए एक नए चंद्र खनिज (मिनिरल) की खोज की है।

चीन ने किया अमेरिका को टेंशन देने वाला काम! यह है अगले 10 साल की तैयारी

कहा जाता है कि स्‍पेस माइनिंग दोनों देशों के बीच टेंशन का अगला सोर्स हो सकती है।

ख़ास बातें
  • चीन का लक्ष्य चंद्रमा पर बेस्‍ड एक इंटरनेशनल रिसर्च स्‍टेशन बनाना है
  • तीन ऑर्बिटर्स भेजने की भी मंजूरी मिली है उसकी स्‍पेस एजेंसी को
  • चीन के Chang’e-5 मिशन से उसे चंद्रमा के नए सैंपल मिले हैं
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चीन हर सेक्‍टर में अमेरिका को चुनौती दे रहा है, तो फ‍िर विज्ञान का क्षेत्र पीछे क्‍यों रहे। अगले 10 साल में चीन, चंद्रमा पर तीन मानव रहित मिशन शुरू करने की योजना बना रहा है। ध्‍यान रखने वाली बात यह है कि इसी पीरियड में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) भी अपने कई मून मिशन लॉन्‍च करेगी, हालांकि उसका आर्टिमिस 1 (Artemis I) मिशन अभी तक लॉन्‍च नहीं हो पाया है। चीनी सरकार के समर्थित टीवी चैनल CCTV ने चीन लूनार एक्सप्लोरेशन एंड स्पेस प्रोग्राम सेंटर के एक अधिकारी लियू जिझोंग के हवाले से बताया है कि चीन के नेशनल स्‍पेस एडमिनिस्‍ट्रेशन को Chang'e लूनार प्रोग्राम के हिस्से के रूप में चंद्रमा पर तीन ऑर्बिटर्स भेजने की मंजूरी मिली है। लियू ने कहा कि चीन का लक्ष्य चंद्रमा पर बेस्‍ड एक इंटरनेशनल रिसर्च स्‍टेशन बनाना है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने कहा है कि उसने अपने Chang'e-5  मिशन से मिले सैंपल्‍स के जरिए एक नए चंद्र खनिज (मिनिरल) की खोज की है। इसे चेंजसाइट- (वाई) (Changesite-(Y) नाम दिया गया है। सिन्हुआ न्‍यूज एजेंसी ने इसे एक तरह के रंगहीन पारदर्शी क्रिस्टल के रूप में वर्णित किया था। कहा जाता है कि इसमें हीलियम-3 है, जो एक आइसोटाइप है और जिसे भविष्य का ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। 
अंतरिक्ष में चीन के बढ़ते कदमों ने दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसी के सामने चुनौती पेश की है। चीन ने अंतरिक्ष में अपनी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ा दिया है। वह चंद्रमा पर अपने प्रोब भेज रहा है। अपना अंतरिक्ष स्टेशन बना रहा है और मंगल ग्रह पर भी अभ‍ियानों को तेज कर रहा है। इससे वह सीधे नासा और अमेरिका से मुकाबला कर रहा है। नासा के पास भी मंगल ग्रह के लिए कई मिशन हैं। अभी नासा का एक रोवर लाल ग्रह पर मौजूद है। इस दशक के आखिर तक नासा एक बार फ‍िर से चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना चाहती है। इसके लिए उसने आर्टिमिस मिशन को तैयार किया है। हालांकि इस मिशन की शुरुआत अब तक नहीं हो पाई है और पहला लॉन्‍च दो बार टाला जा चुका है।  

अमेरिका और चीन दोनों की नजरें चंद्रमा के खनिजों पर हैं। कहा जाता है कि स्‍पेस माइनिंग देशों के बीच टेंशन का अगला सोर्स हो सकती है। हाल के महीनों में चीन और नासा के बीच अंतरिक्ष को लेकर बयानबाजी भी देखने को मिली है। नासा के एडमिनिस्‍ट्रेटर बिल नेल्‍सन चीन पर अमेरिका की स्‍पेस टेक्‍नॉलजी चुराने का आरोप लगा चुके हैं। चीन द्वारा अंतरिक्ष में उसके मलबे की अनदेखी करने पर भी उन्‍होंने चीन की आलोचना की है।  

चीन के लूनार एक्‍स्‍प्‍लोरेशन प्रोग्राम की शुरुआत साल 2004 में हुई थी। इसके 3 साल बाद उसने पहला अंतरिक्ष यान लॉन्च किया था। चीन का आगामी Chang'e-7 प्रोग्राम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को टार्गेट करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चंद्रमा पर पानी खोजने के लिए सबसे अच्छी जगह है। नासा भी चांद के उस हिस्से को टार्गेट कर रही है।
 

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