धरती से टकराने से पहले रोके जाएंगे एस्टेरॉयड! जानिए क्या है Blue Origin का बड़ा मिशन

Blue Origin ने NASA और Caltech के साथ मिलकर NEO Hunter मिशन पर काम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य खतरनाक एस्टेरॉयड्स की पहचान और उनकी दिशा बदलना है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 20 मार्च 2026 18:41 IST
ख़ास बातें
  • Blue Origin और NASA मिलकर एस्टेरॉयड डिफेंस मिशन पर काम कर रहे
  • आयन बीम और टक्कर तकनीक से बदली जाएगी अंतरिक्ष चट्टानों की दिशा
  • Blue Ring प्लेटफॉर्म से डीप स्पेस में किया जाएगा खतरे का आकलन

Photo Credit: Blue Origin

Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin अब धरती को अंतरिक्ष खतरों से बचाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी ने NASA के Jet Propulsion Laboratory और California Institute of Technology के रिसर्चर्स के साथ मिलकर एक नए मिशन पर काम शुरू किया है, जिसका नाम Near Earth Objects (NEO) Hunter रखा गया है। इस मिशन का उद्देश्य ऐसे खतरनाक एस्टेरॉयड्स की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर उनकी दिशा बदलना है, ताकि वे पृथ्वी से टकराने से पहले ही रोके जा सकें।

यह मिशन Blue Origin के Blue Ring स्पेसक्राफ्ट प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जो एक मॉड्यूलर सैटेलाइट सिस्टम है। कंपनी के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म एक साथ कई तरह के मिशन को सपोर्ट कर सकता है और लो अर्थ ऑर्बिट से लेकर डीप स्पेस तक ऑपरेट करने में सक्षम है। NEO Hunter इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष में संभावित खतरों को ट्रैक और एनालाइज करेगा।

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मिशन को दो चरणों में डिजाइन किया गया है। पहले चरण में छोटे-छोटे cubesats को लॉन्च किया जाएगा, जो संदिग्ध एस्टेरॉयड के पास जाकर उसकी संरचना, वजन और घनत्व जैसी जानकारी जुटाएंगे। यह डेटा यह तय करने में मदद करेगा कि उस ऑब्जेक्ट की दिशा बदलने के लिए कौन सा तरीका सबसे प्रभावी रहेगा।

इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो Blue Ring का आयन बीम सिस्टम एक्टिव किया जाएगा। यह तकनीक चार्ज्ड पार्टिकल्स की एक बीम एस्टेरॉयड पर फेंककर उसकी दिशा बदलने की कोशिश करती है। इस तरह का कॉन्सेप्ट पहले भी स्पेस मिशन में इस्तेमाल किया जा चुका है और इसे भविष्य के लिए एक संभावित डिफेंस टेक्नोलॉजी माना जा रहा है।

अगर एस्टेरॉयड बहुत बड़ा या तेज गति वाला हुआ, तो मिशन के दूसरे फेज में “Robust Kinetic Disruption” तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें स्पेसक्राफ्ट सीधे एस्टेरॉयड से टकराएगा ताकि उसकी दिशा बदल सके। इस तरह का प्रयोग NASA पहले DART मिशन में कर चुका है, जहां एक एस्टेरॉयड की कक्षा सफलतापूर्वक बदली गई थी।

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Photo Credit: Blue Origin

NEO Hunter मिशन में एक छोटा सैटेलाइट “Slamcam” भी शामिल होगा, जिसे टकराव से पहले रिलीज किया जाएगा ताकि पूरे इम्पैक्ट को रिकॉर्ड किया जा सके और मिशन की सफलता को कन्फर्म किया जा सके।

Blue Origin का कहना है कि Blue Ring जैसे कमर्शियल प्लेटफॉर्म की मदद से कम लागत में भी बड़े और जरूरी स्पेस मिशन पूरे किए जा सकते हैं, जिनमें साइंस, एक्सप्लोरेशन और प्लैनेटरी डिफेंस शामिल हैं।

 

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