NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले Telegram पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। NTA का दावा है कि ऐप के Edit Feature का इस्तेमाल कथित फर्जी पेपर लीक स्कैम में किया जा रहा था।
Photo Credit: Unsplash/ Christian Wiediger
NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले भारत सरकार ने Telegram पर अस्थायी रोक लगा दी है। ऐप को 22 जून तक बैन किया गया है, जबकि Telegram के Message Edit फीचर पर 30 जून तक प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर Telegram का कौन-सा फीचर सरकार और NTA की चिंता की वजह बना।
NTA के मुताबिक, पूरा मामला Telegram के Edit Feature से जुड़ा है। यह फीचर यूजर्स को मैसेज भेजने के बाद उसमें बदलाव करने की सुविधा देता है। सिर्फ टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि मैसेज के साथ अटैच की गई फाइल्स और PDF भी बदली जा सकती हैं। एजेंसी का दावा है कि इसी फीचर का इस्तेमाल कथित पेपर लीक और फर्जीवाड़े से जुड़े स्कैम में किया गया।
Telegram में यूजर्स भेजे गए मैसेज को बाद में एडिट कर सकते हैं। अगर किसी मैसेज के साथ PDF या दूसरी फाइल अटैच की गई हो तो उसे भी बदला जा सकता है। NTA का कहना है कि कुछ लोगों ने इसी फीचर का फायदा उठाकर NEET पेपर लीक से जुड़े फर्जी दावे किए।
एजेंसी के मुताबिक, स्कैमर्स परीक्षा से एक-दो दिन पहले कथित "लीक पेपर" बेचते थे। परीक्षा खत्म होने के बाद वही लोग पुराने मैसेज को एडिट करके उसमें असली प्रश्नपत्र की PDF जोड़ देते थे। चूंकि मैसेज की मूल तारीख पुरानी ही दिखाई देती थी, इसलिए ऐसा लगता था कि प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध था।
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि परीक्षा के बाद एजेंसी को ऐसे मामलों की शिकायतें मिली थीं। उनके मुताबिक, कुछ Telegram चैनलों पर ऐसे पोस्ट दिखाए गए जिनमें दावा किया गया कि प्रश्नपत्र परीक्षा से दो दिन पहले शेयर किया गया था।
एजेंसी का कहना है कि पुराने मैसेज में नई फाइल जोड़कर स्क्रीनशॉट वायरल किए जाते थे, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैलता था। इसी वजह से Telegram के Edit Feature को लेकर चिंता जताई गई।
Telegram के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने ऐप पर लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना की है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि Edit Feature का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कंपनी बदलाव कर रही है।
Durov ने कहा कि Telegram "edited" लेबल को और ज्यादा स्पष्ट बनाने पर काम कर रहा है ताकि बैकडेटिंग स्कैम को रोका जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में भारत में एग्जाम मटेरियल और उससे जुड़े स्कैम फैलाने वाले सैकड़ों चैनलों को हटाया गया है।
NTA का कहना है कि कार्रवाई का मकसद NEET री-एग्जाम से पहले फर्जी पेपर लीक संदेशों और स्कैम को रोकना है। वहीं कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि किसी फीचर के गलत इस्तेमाल की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना कितना सही है।
फिलहाल Telegram पर अस्थायी रोक लागू है, लेकिन इस पूरे विवाद ने मैसेज एडिटिंग जैसे फीचर्स की सुरक्षा और उनके संभावित दुरुपयोग को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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