McAfee की जुलाई 2026 की रिसर्च में सामने आया कि AI बिना GPS या लोकेशन टैग के भी ट्रैवल फोटो से शहर और देश का अंदाजा लगा सकता है।
Photo Credit: AI Generated
सोशल मीडिया पर घूमने-फिरने की तस्वीरें शेयर करना आज आम बात है। लेकिन किसी फोटो में GPS लोकेशन या दूसरी जानकारी सेव नहीं होने के बावजूद भी उससे आपकी जगह का अंदाजा लगाया जा सकता है। McAfee की जुलाई 2026 में पब्लिश्ड रिसर्च में AI की इसी क्षमता को टेस्ट किया गया था। रिसर्च में पाया गया कि सिर्फ एक ट्रैवल फोटो देखकर AI कई मामलों में उसके शहर और देश की पहचान कर सकता है। आज के सोशल मीडिया वर्ल्ड में ये सही मायने में एक चौंकाने वाली खबर है। चलिए स्टडी को विस्तार से समझते हैं।
इसके लिए फोटो में मौजूद छोटे-छोटे संकेत काम आते हैं। किसी जगह की इमारतें, सड़कें, साइनबोर्ड, दुकान के नाम, भाषा, गाड़ियां, ट्रैफिक साइन, लैंडमार्क और आसपास का माहौल AI को लोकेशन का अंदाजा लगाने में मदद कर सकते हैं। यानी फोटो से लोकेशन का पता लगाने के लिए हमेशा उसमें GPS टैग या मेटाडेटा मौजूद होना जरूरी नहीं है। AI तस्वीर में दिखाई देने वाली चीजों को पहचानकर उनके आधार पर संभावित जगह का अनुमान लगा सकता है।
McAfee ने अपनी रिसर्च में 21,236 ट्रैवल तस्वीरों को AI मॉडल्स के जरिए टेस्ट किया। कंपनी ने यह देखने की कोशिश की कि बिना किसी जियोटैग या मेटाडेटा के AI सिर्फ तस्वीर देखकर उसकी लोकेशन का कितना सही अनुमान लगा सकता है।
इस टेस्ट में दो विजन AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया गया। McAfee के मुताबिक Qwen 3 VL 30B ने 91 प्रतिशत मामलों में शहर और देश की सही पहचान की, जबकि Gemma 3 27B ने 87 प्रतिशत मामलों में सही जानकारी दी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका मतलब यह नहीं है कि AI हर तस्वीर से आपकी सटीक लोकेशन निकाल सकता है। इसकी सफलता फोटो में मौजूद विजुअल संकेतों पर निर्भर करती है। जितनी ज्यादा पहचान योग्य जानकारी तस्वीर में होगी, लोकेशन का अनुमान लगाने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
McAfee ने सिर्फ इंटरनेट पर पहले से मौजूद ट्रैवल तस्वीरों तक ही टेस्ट सीमित नहीं रखा। कंपनी ने 102 निजी तस्वीरों पर भी AI की क्षमता को जांचा। इन तस्वीरों को पहले सार्वजनिक रूप से पोस्ट नहीं किया गया था।
इस टेस्ट में ChatGPT, Claude और Copilot जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल किया गया। मकसद यह देखना था कि अगर किसी व्यक्ति की निजी फोटो AI के सामने रखी जाए, तो उसमें मौजूद विजुअल संकेतों से उसकी जगह के बारे में कितनी जानकारी निकाली जा सकती है। इससे एक बात साफ होती है कि फोटो की प्राइवेसी सिर्फ उसके GPS डेटा से तय नहीं होती। तस्वीर खुद भी काफी जानकारी दे सकती है।
इस रिसर्च के बाद सोशल मीडिया पर ट्रैवल फोटो शेयर करने वाले यूजर्स को थोड़ा सावधान रहना चाहिए। खासकर ऐसी तस्वीरें पोस्ट करते समय जिनमें घर, होटल, सड़क का नाम, दुकान का बोर्ड, ऑफिस, स्कूल या किसी दूसरी पहचान योग्य जगह की जानकारी साफ दिखाई दे रही हो।
अगर फोटो तुरंत पोस्ट करना जरूरी नहीं है तो यात्रा के दौरान अपनी लाइव लोकेशन पब्लिक करने के बजाय बाद में तस्वीरें शेयर करना भी एक ऑप्शन है। इससे किसी अनजान व्यक्ति को यह पता लगाने में मदद नहीं मिलेगी कि आप उस समय कहां मौजूद हैं।
McAfee की यह रिसर्च 1 जुलाई 2026 को पब्लिश हुई थी। इसलिए इसे कोई नई सुरक्षा चेतावनी नहीं कहा जा सकता, लेकिन AI की तस्वीरों को समझने और उनसे लोकेशन जैसी जानकारी निकालने की क्षमता को लेकर यह टेस्ट सोशल मीडिया यूजर्स के लिए अब भी एक उपयोगी चेतावनी है।
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