लैंडिंग साइट के सबसर्फेस के 300 मीटर नीचे शुष्क परिस्थितियों के होने की बात कही गई है। इससे वहां जीवन पनपने की उम्मीद चुनौती दिख रही है।
टीम ने अपनी रिसर्च में पाया है कि इस ग्रह के इतिहास के शुरुआती दिनों में मंगल पर पानी के महासागरों रहे होंगे।
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