बिना शादी वालों में होता है कैंसर का ज्यादा खतरा!

शोधकर्ताओं ने कहा कि शादी स्वयं कैंसर से बचाव नहीं करती है लेकिन जीवनशैली का अंतर इसमें अहम रोल अदा करता है।

बिना शादी वालों में होता है कैंसर का ज्यादा खतरा!

Photo Credit: dreamstime

जिन लोगों ने कभी शादी नहीं की उनके अंदर कैंसर होने की संभावना ज्यादा- स्टडी में दावा

ख़ास बातें
  • महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा यह खतरा और ज्यादा होता है।
  • कैंसर के 40 लाख से ज्यादा केसों को स्टडी किया गया।
  • जीवनशैली का अंतर इसमें अहम रोल अदा करता है।
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सिंगल यानी गैर-शादीशुदा लोगों में कैंसर का रिस्क ज्यादा होता है! जी हां, ऐसा हम नहीं, एक बड़ी स्टडी कहती है। यह स्टडी 40 लाख से ज्यादा कैंसर केसों को लेकर की गई है। स्टडी के आधार पर कहा गया है कि जिन लोगों ने कभी शादी नहीं की उनके अंदर कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है, बजाए कि शादीशुदा लोगों के। आंकड़ा काफी बड़ा है। यहां पर एक और रोचक तथ्य यह भी सामने आया है कि महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा यह खतरा और ज्यादा होता है। आइए जानते हैं विस्तार से। 

अमेरिका में कैंसर के 40 लाख से ज्यादा केसों को स्टडी किया गया जिसमें सामने आया कि शादीशुदा लोगों की तुलना में गैर-शादीशुदा लोगों में कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है। मायामी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 12 देशों के कैंसर केसों को मिलाकर यह स्टडी की। 2015 से 2022 के बीच यह डी की गई है। रिसर्चर्स ने पाया कि 68% प्रतिशत पुरुषों में यह खतरा ज्यादा पाया गया जबकि महिलाओं में यह 85% ज्यादा था। 

शोधकर्ताओं ने कहा कि शादी स्वयं कैंसर से बचाव नहीं करती है लेकिन जीवनशैली का अंतर इसमें अहम रोल अदा करता है। इसी के साथ कई सामाजिक कारक भी हैं जो कैंसर होने या न होने की स्थिति पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। 

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट फ्रेंक पेनेडो के अनुसार, अगर आपने शादी नहीं की है तो आपको कैंसर के जोखिम की तरफ ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। आपको इसके लिए स्क्रीनिंग करानी चाहिए, साथ ही स्वास्थ्य के प्रति बहुत जागरूक रहना चाहिए। इसमें धूम्रपान, नित्य तनाव, और प्रजनन इतिहास का संबंध मैरिटल स्टेटस के साथ जोड़ा गया है। यह भी संभव है कि स्वस्थ लोग स्वाभाविक रूप से शादी करने की अधिक संभावना रखते हों। शोध के उद्देश्य से साथ रहने वाले या लिव-इन में रहने वाले अविवाहित जोड़ों को एकल के रूप में वर्गीकृत किया गया था।

टीम ने स्टडी के आधार पर सुझाव दिया कि यदि कोई पार्टनर नियमित जांच के लिए प्रोत्साहित करता है, तो इससे रोग का शीघ्र पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है। स्तन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसे उन कैंसरों के लिए, जिनके लिए सुस्थापित स्क्रीनिंग कार्यक्रम मौजूद हैं, यह अंतर काफी कम था।
 

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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