सैटेलाइट इंटरनेट अब एक नया तरीका बनने जा रहा है, जिससे लोगों को फास्ट इंटरनेट की सुविधा मिलेगी।
डायरेक्ट टू डिवाइस खासतौर पर रिमोट एरिया में मददगार साबित होता है।
Photo Credit: Pexels/Juan Martin Gomez
सैटेलाइट इंटरनेट अब एक नया तरीका बनने जा रहा है, जिससे लोगों को फास्ट इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। Starlink और Jio के बाद अब Tata भी इसमें कदम रखने जा रहा है।टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर नेल्को लिमिटेड भारत में 2028 तक अपनी डायरेक्ट टू डिवाइस (D2D) सैटेलाइट सर्विस चालू कर सकती है। इसके अलावा साल के आखिर तक कंपनी ट्रायल्स भी शुरू करने का प्लान बना रही है। सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस को भारत के साथ-साथ श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे बाजारों में भी उपलब्ध करवाया जा सकता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
डायरेक्ट टू डिवाइस क्या है?
डायरेक्ट टू डिवाइस इंटरनेट का एक ऐसा प्रकार है, जिसे सीधे अंतरिक्ष से प्राप्त सिग्नल से डिवाइस में भेजा जाता है। दुनिया भर में इस समय 6G से भी ज्यादा जोर D2D पर दिया जा रहा है। अब तक Starlink यूएस में इस सर्विस को शुरू भी कर चुका है।
Nelco ने की अमेरिकन कंपनी से साझेदारी
टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर Nelco ने साउथ एशिया मार्केट में डायरेक्ट-टू-डिवाइस और IoT कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए अमेरिका की सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी लूनर होल्डको (एल्वियो मोबाइल/एल्वियो) के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और इन्वेस्टमेंट की घोषणा की है।
डायरेक्ट टू डिवाइस का फायदा
डायरेक्ट टू डिवाइस खासतौर पर रिमोट एरिया में मददगार साबित होता है। ऐसे क्षेत्रों में जहां पर नेटवर्क लाइन और टावर लगाना आसान नहीं होता है तो D2D वहां पर भी आसानी से काम कर सकता है। इसमें डिवाइस को इंटरनेट सीधे सैटेलाइट के जरिए मिलता है, जिससे क्षेत्र के आधार पर कोई रुकावट की दिक्कत नहीं होती है। यानी कि अब अपना डिवाइस लेकर किसी भी कोने में चले जाएं, लेकिन इंटरनेट की कनेक्टिविटी मिलती रहेगी। पहाड़ से लेकर रेगिस्तान और किसी टापू पर भी यह नेटवर्क पहुंच जाएगा।
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