इंटरनेट को बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

लगभग दो वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि इंटरनेट सर्विसेज को बिना स्पष्ट कारण बताए बंद करना गैर कानूनी है

विज्ञापन
Written by डेविड डेलिमा, Edited by आकाश आनंद, अपडेटेड: 10 सितंबर 2022 16:50 IST
ख़ास बातें
  • एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने सरकार से इसका कारण पूछा है
  • कुछ राज्यों में परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए इंटरनेट बंद किया जाता है
  • सुप्रीम कोर्ट ने एक पिछले फैसले में कहा था कि ऐसा करना गैर कानूनी है

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या इस समस्या से निपटने के लिए कोई प्रोटोकॉल मौजूद है

देश के विभिन्न राज्यों में एकतरफा तरीके से इंटरनेट को बंद किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) से जवाब देने को कहा है। इस बारे में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मिनिस्ट्री से इसका कारण पूछा है। लगभग दो वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि इंटरनेट सर्विसेज को बिना स्पष्ट कारण बताए बंद करना गैर कानूनी है।

कुछ राज्य सरकारें ऐसे क्षेत्रों में नियमित तौर पर इंटरनेट को बंद कर देती हैं जहां परीक्षाएं हो रही हैं। इसका कारण परीक्षाओं में धोखाधड़ी को रोकना होता है। चीफ जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस एस रवीन्द्र भट्ट और पी एस नरसिम्हा की बेंच ने सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर की ओर से दायर जनहित याचिका पर मिनिस्ट्री से जवाब देने को कहा है। याचिका में आरोप लगाया है कि अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इंटरनेट सर्विसेज को बंद किया जाता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या इस समस्या से निपटने के लिए कोई प्रोटोकॉल मौजूद है। कोर्ट का कहना है कि वह इस मामले में इंटरनेट सर्विसेज बंद करने वाले राज्यों के बजाय मिनिस्ट्री को नोटिस जारी कर रहा है। 

परीक्षाओं में धोखाधड़ी को रोकने के लिए कुछ राज्यों में इंटरनेट को बंद किया जाता है। एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को बताया कि इसे लेकर राजस्थान और पश्चिम बंगाल के हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका राजस्थान में हाल ही में सामुदायिक तनाव और विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान इंटरनेट को बंद करने की जानकारी दी गई है। 

याचिका में पूछा गया है कि क्या इन कारणों के लिए इंटरनेट को बंद किया जा सकता है। इसके साथ ही यह बताया गया है कि संसद की एक समिति ने धोखाधड़ी को रोकने के लिए इस तरह के उपाय नहीं करने का सुझाव दिया था। बेंच ने कहा कि अदालतों को अनुराधा भसीन के मामले में तय उदाहरण का पालन करने के लिए कहा जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया था कि इंटरनेट को बंद करने के लिए जरूरत और अनुपात के नियम पूरे किए जाने चाहिए। इंटरनेट सर्विसेज को स्पष्ट कारण की जानकारी दिए बिना बंद करना गैर कानूनी है। 
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

ये भी पढ़े: Services, Court, Government, Internet, Market, States, reason, Notice, Protocol

Gadgets 360 में टेक्नोलॉजी लेखक के ...और भी

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Xiaomi ने बिजली बचाने वाला नया AC किया लॉन्च, पावरफुल कम्प्रेसर से लैस, जानें कीमत
  2. Samsung के ट्रिपल फोल्ड स्मार्टफोन की बंद हुई बिक्री, जानें कारण....
  3. लड़खड़ाया, टकराया, फिर भी जीता - Honor के रोबोट ने तोड़ा इंसानों का वर्ल्ड रिकॉर्ड!
  4. 13 मेगापिक्सल कैमरा, 6500mAh बैटरी के साथ Tecno Pop X 5G लॉन्च, जानें कीमत
#ताज़ा ख़बरें
  1. 13 मेगापिक्सल कैमरा, 6500mAh बैटरी के साथ Tecno Pop X 5G लॉन्च, जानें कीमत
  2. Xiaomi ने लॉन्च किया Central AC, AI तय करेगा कितनी कूलिंग की जरूरत!
  3. 6500mAh बैटरी वाले Infinix Note 60 Pro की सेल हुई आज से शुरू, जानें कीमत
  4. लड़खड़ाया, टकराया, फिर भी जीता - Honor के रोबोट ने तोड़ा इंसानों का वर्ल्ड रिकॉर्ड!
  5. WhatsApp कॉल के लिए AI जनरेटेड कॉल बैकग्राउंड कैसे बनाएं, ये है आसान तरीका
  6. Vivo T5 Pro 5G vs Redmi Note 15 Pro 5G vs Realme 15 Pro 5G: खरीदने से पहले देखें कौन सा है बेस्ट फोन
  7. Google के Pixel फोन की कीमत हुई आधे से भी ज्यादा कम, मिल रहा 23 हजार रुपये सस्ता
  8. Samsung के ट्रिपल फोल्ड स्मार्टफोन की बंद हुई बिक्री, जानें कारण....
  9. Sony Xperia 1 VIII में मिल सकता है स्क्वेयर कैमरा आइलैंड, जल्द लॉन्च की तैयारी
  10. सूरज की आग से धूमकेतु हो गया राख! नासा ने दिखाईं गजब तस्वीरें
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.