RBI के पॉलीमर नोटों पर विचार की खबरों के बीच जानें प्लास्टिक करेंसी क्या होती है, इसके फायदे क्या हैं और यह कागज के नोटों से कितनी अलग है।
Photo Credit: AI Generated
पॉलीमर नोट कागजी करेंसी के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं
भारत में इस्तेमाल होने वाले कागज के नोट आने वाले समय में बदल सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर पॉलीमर यानी प्लास्टिक आधारित करेंसी नोटों के ऑप्शन पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक बढ़ती कैश डिमांड, नोटों की लाइफ और प्रिंटिंग लागत जैसे पहलुओं को देखते हुए इस तकनीक पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी तक RBI की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में आइए समझते हैं कि पॉलीमर नोट क्या होते हैं और ये मौजूदा कागजी नोटों से कितने अलग हैं।
पॉलीमर नोट सामान्य कागज से नहीं बनाए जाते। इन्हें एक खास टाइप की प्लास्टिक फिल्म से तैयार किया जाता है, जिसे पॉलीमर सब्सट्रेट कहा जाता है। यह मटेरियल पारंपरिक कागज की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ माना जाता है। दुनिया के कई देशों ने पिछले कुछ दशकों में इसी तकनीक को अपनाया है।
कागज के नोट लगातार इस्तेमाल के दौरान जल्दी घिसने लगते हैं। कई बार नमी, पानी या बार-बार मोड़ने की वजह से वे खराब भी हो जाते हैं। पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे पानी और नमी से कम प्रभावित होते हैं। इसके अलावा ये जल्दी फटते नहीं हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसी वजह से केंद्रीय बैंकों को बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ सकती है।
पॉलीमर नोटों में कई एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जा सकते हैं। इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग और खास सिक्योरिटी एलिमेंट्स शामिल होते हैं। इन फीचर्स की वजह से नकली नोट तैयार करना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। यही कारण है कि कई देशों ने करेंसी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पॉलीमर तकनीक को अपनाया है।
ऑस्ट्रेलिया को पॉलीमर नोट शुरू करने वाला पहला देश माना जाता है। इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रुनेई, रोमानिया, वियतनाम और पापुआ न्यू गिनी जैसे कई देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया। आज दुनिया के कई हिस्सों में पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसे आधुनिक करेंसी प्रिंटिंग तकनीक का हिस्सा माना जाता है।
पॉलीमर नोट भारत के लिए पूरी तरह नया विचार नहीं है। साल 2012 में केंद्र सरकार ने चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी थी। हालांकि बाद में यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू नहीं हो सकी। अब एक बार फिर इसके इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू हुई है।
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। मीडिया रिपोर्ट्स में पॉलीमर नोटों पर चर्चा और संभावित पायलट प्रोजेक्ट की बात कही गई है, लेकिन RBI ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। अगर भविष्य में केंद्रीय बैंक इस तकनीक को अपनाने का फैसला करता है, तो यह भारतीय करेंसी सिस्टम में एक बड़ा तकनीकी बदलाव हो सकता है।
अगर पॉलीमर नोट लागू होते हैं तो आम लोगों को ज्यादा टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले नोट मिल सकते हैं। साथ ही नकली नोटों की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि इसके लिए अभी RBI के आधिकारिक फैसले का इंतजार करना होगा।
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