भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद ने 6G टेक्नोलॉजी में बढ़त हासिल की है, जिससे यह साफ होता है कि भारत में इसमें एक अहम भूमिका निभाएगा।
Photo Credit: Unsplash/Marc-Olivier Jodoin
फास्ट इंटरनेट पर तेजी से काम चल रहा है।
भारत में जहां कई टेलीकॉम कंपनियां 5G का पूरे देश में विस्तार करने का काम कर रही हैं। वहीं साथ ही साथ 6G पर भी काम होने लगा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद ने 6G टेक्नोलॉजी में बढ़त हासिल की है, जिससे यह साफ होता है कि भारत में इसमें एक अहम भूमिका निभाएगा। इंस्टीट्यूट के प्रमुख टेलीकम्युनिकेशन रिसर्चर प्रोफेसर किरण कुची ने कहा कि यह 2030 तक लागू होने की उम्मीद है। 6G सिर्फ 5G से तेज ही नहीं बल्कि यह शहरी, ग्रामीण, घर के अंदर, बाहर, जमीन, समुद्र और आकाश में बेहतर हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को AI के साथ जोड़ेगा। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
IIT हैदराबाद 6G की ग्रोथ में सबसे आगे है। उन्होंने आगे कहा कि कई सरकारी संस्थानों और डिपार्टमेंट के सपोर्ट के साथ इंस्टीट्यूट पहले ही 7 GHz बैंड में 6G प्रोटोटाइप, एडवांस MIMO (मल्टीपल-इनपुट मल्टीपल-आउटपुट) एंटीना एरेज और LEO (लो अर्थ ऑर्बिट) और GEO (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) दोनों ऑर्बिट के लिए सैटेलाइट-कंप्लाइंट सिस्टम का प्रदर्शन कर चुका है। हर दशक में दुनिया मोबाइल टेक्नोलॉजी की एक नई जनरेशन की शुरुआत करती है। 5G को 2010-2020 के बीच स्टैंडर्ड किया गया था। भारत ने 2022 में 5G की शुरुआत की और अभी भी पूरे भारत में इसका विस्तार हो रहा है। 6G को स्टैंडर्ड बनाने पर काम 2021 में शुरू हुआ और ग्लोबल स्टैंडर्ड के 2029 तक और इसके 2030 के करीब लागू होने की उम्मीद है।
IIT हैदराबाद में डिजाइन किया गया लो-पावर वाला सिस्टम-ऑन-चिप पहले से ही नागरिक और डिफेंस उपयोग के लिए स्थलीय और सैटेलाइट कनेक्टिविटी का सपोर्ट करता है। अब प्रयास हो रहा है कि इसका हाई परफॉर्मेंस वाले 6G-AI चिपसेट में विस्तार हो। इन इनोवेशन को स्टार्ट-अप्स में तैयार किया जा रहा है, ग्लोबल स्टैंडर्ड में शामिल किया जा रहा है और कमर्शियलाइजेशन की ओर बढ़ाया जा रहा है, जिससे यह साफ हो सके कि भारत की टेक्नोलॉजी ग्लोबल स्टैंडर्ड में आए।
6G से AR/VR अनुभव बेहतर होने के साथ, AI सपोर्ट वाले डिवाइस, ऑटोनोमस मोबिलिटी और इंटेलीजेंट IoT में पावर मिलने की उम्मीद है। तेज इंटरनेट खेतों, फैक्टरी, स्कूल, अस्पतालों और डिफेंस से लेकर आपदा में मदद के लिए AI के साथ मिलकर काम करेगा और लोगों के जीवन को प्रभावित करेगा। जैसे-जैसे 6G के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड तैयार हो रहे हैं, भारत के स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास के नतीजे भी सामने आने लगे हैं। नेटवर्क, डिवाइस, एआई ऐप्लिकेशन और फैबलेस चिप डिजाइन में देश के स्तर पर इनोवेशन से भारत उपभोग करने के साथ-साथ ग्लोबल स्तर पर सप्लायर और स्टैंडर्ड तय करने के तौर पर स्थापित होने के लिए तैयार हैं। 2030 तक जब दुनिया 6G को अपनाना शुरू करेगी, भारत अपनी टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट और अपनी कंपनियों और अपने इकोसिस्टम के साथ तैयार होगा।
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