भारत ने रचा एविएशन इतिहास! सैटेलाइट से होगी विमान की लैंडिंग, जानें क्या है ISRO का GAGAN सिस्टम

IndiGo का Airbus A320 पहली बार ISRO के GAGAN सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम से सफलतापूर्वक लैंड हुआ। जानें GAGAN कैसे काम करता है और यह क्यों खास है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 30 जून 2026 07:33 IST
ख़ास बातें
  • पहली बार GAGAN से उतरा कमर्शियल Airbus A320
  • ISRO और AAI ने मिलकर डेवलप की है टेक्नोलॉजी
  • छोटे एयरपोर्ट्स पर भी आसान हो सकती है प्रिसिजन लैंडिंग

IndiGo का Airbus A320 पहली बार GAGAN सैटेलाइट सिस्टम की मदद से लैंड हुआ

Photo Credit: AI Generated

भारत ने एविएशन सेक्टर में एक नई उपलब्धि हासिल की है। IndiGo का एक Airbus A320 विमान हाल ही में उदयपुर के महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पर GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) सिस्टम की मदद से सफलतापूर्वक उतारा गया। खास बात यह है कि यह भारत का पहला कमर्शियल जेट है, जिसने पारंपरिक ग्राउंड-बेस्ड इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की बजाय स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए लैंडिंग की। चलिए आपको विस्तार से बताते हैं कि GAGAN सिस्टम आखिर क्या है और इसके भारत के लिए क्या मायने हैं।

क्या है GAGAN सिस्टम?

GAGAN यानी GPS Aided GEO Augmented Navigation एक सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम है, जिसे ISRO और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर डेवलप किया है। यह GPS का विकल्प नहीं है, बल्कि उसकी सटीकता बढ़ाने वाला सिस्टम है। GPS से मिलने वाले सिग्नल वातावरण से गुजरते समय प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उनकी सटीकता कम हो जाती है। GAGAN इन गलतियों को रियल टाइम में सुधारकर विमान तक अधिक सटीक लोकेशन डेटा पहुंचाता है।

IndiGo विमान की लैंडिंग कैसे हुई?

GAGAN सिस्टम के तहत देशभर में लगे रेफरेंस स्टेशन लगातार GPS सिग्नल की निगरानी करते हैं और उनमें आने वाली त्रुटियों का पता लगाते हैं। इसके बाद कंट्रोल सेंटर इन डेटा को प्रोसेस करके ISRO के GSAT सैटेलाइट्स तक भेजता है। सैटेलाइट्स यह करेक्शन डेटा सीधे विमान तक पहुंचाते हैं, जिससे पायलट को रनवे तक पहुंचने के लिए बेहद सटीक हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल गाइडेंस मिलती है। इस तकनीक की मदद से विमान कम विजन की स्थिति में भी सुरक्षित तरीके से लैंड कर सकता है।

सुरक्षा के लिए कैसे काम करता है सिस्टम?

GAGAN में एक इंटीग्रिटी मॉनिटरिंग सिस्टम भी मौजूद है। अगर मौसम या अन्य वजहों से सैटेलाइट सिग्नल में कोई गड़बड़ी आती है, तो सिस्टम कुछ ही सेकेंड में पायलट को अलर्ट भेज देता है। इससे जरूरत पड़ने पर पायलट लैंडिंग रोककर दूसरी प्रक्रिया अपना सकता है।

छोटे एयरपोर्ट्स के लिए क्यों अहम है यह तकनीक?

पारंपरिक Instrument Landing System (ILS) लगाने के लिए एयरपोर्ट पर महंगे उपकरण और अलग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। यही वजह है कि देश के कई छोटे और क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। GAGAN की मदद से बिना बड़े ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के भी सैटेलाइट आधारित प्रिसिजन लैंडिंग संभव हो सकती है। इससे भविष्य में टियर-2 और टियर-3 शहरों के एयरपोर्ट्स पर भी खराब मौसम में सुरक्षित लैंडिंग आसान हो सकती है।

भारत के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?

अब तक GAGAN तकनीक का टेस्ट छोटे विमानों पर किया जा चुका था, लेकिन पहली बार किसी कमर्शियल Airbus A320 जेट की सफल लैंडिंग इस सिस्टम से कराई गई है। इसे भारत के एविएशन सेक्टर के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तकनीक के ज्यादा एयरपोर्ट्स पर इस्तेमाल से उड़ानों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिल सकती है।

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