अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बीच ईरान में क्रिप्टो एक्टिविटी के लिए CoinEx एक बड़ा जरिए के तौर पर उभरा है। इस एक्सचेंज की शुरुआत चीन के एक इंजीनियर ने की थी
पिछले कुछ वर्षों में ईरान ने क्रिप्टो के जरिए बड़ी मात्रा में फंड ट्रांसफर किया है
पिछले कई वर्षों से अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान में फंड ट्रांसफर के लिए क्रिप्टो सेगमेंट एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। हालांकि, ईरान की ओर से विदेश में की जाने वाली क्रिप्टो से जुड़ी अधिकतर ट्रांजैक्शंस इन प्रतिबंधों से बचने के लिए की जाती हैं। इनमें से कुछ ट्रांजैक्शंस के उत्तर कोरिया के हैकर्स से जुड़े होने का भी पता चला है।
Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्लॉकचेन रिसर्सर्स ने एक जांच में पाया है कि ईरान के सेंट्रल बैंक के कंट्रोल वाले दो क्रिप्टो वॉलेट्स में क्रिप्टो एक्सचेंज Bybit से चुराया गया फंड मौजूद था। Bybit में हैंकिंग के जरिए 1.5 अरब डॉलर का फंड चुराया गया था। इस मामले में नॉर्थ कोरिया के हैकर्स पर आरोप लगा था। ईरान से जुड़े क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर होने के बाद चुराए गए फंड को कई ट्रांजैक्शंस में विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर भेजा गया था। इनमें क्रिप्टो एक्सचेंज CoinEx भी शामिल है।
अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बीच ईरान में क्रिप्टो एक्टिविटी के लिए CoinEx एक बड़ा जरिए के तौर पर उभरा है। इस एक्सचेंज की शुरुआत चीन के एक इंजीनियर ने की थी। ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Nobitex का भी इनमें से कई ट्रांजैक्शंस में इस्तेमाल किया गया था। ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस फर्म TRM Labs ने बताया है कि पिछले कुछ वर्षों में ईरान से जुड़े क्रिप्टो वॉलेट्स ने CoinEx के जरिए लगभग चार अरब डॉलर का फंड भेजा है। ईरान में कारोबारियों और लोगों के बीच क्रिप्टोकरेंसी काफी लोकप्रिय है और इसका कारण इस देश की करेंसी रियाल की वैल्यू में लगातार गिरावट है। एक अनुमान के अनुसार, ईरान की लगभग 13 प्रतिशत जनसंख्या के पास क्रिप्टोकरेंसी है।
पिछले वर्ष ईरान का क्रिप्टो मार्केट लगभग 10 अरब डॉलर होने का अनुमान है। CoinEx ने ईरान में अपनी मौजूदगी को बढ़ाया था। हालांकि, CoinEx ने इससे इनकार किया है और इस एक्सचेंज का कहना है कि उसने ईरान में कभी ऑफिस नहीं खोला है। ईरान से ऑयल के एक्सपोर्ट का भुगतान हासिल करने के लिए भी क्रिप्टोकरेंसीज का इस्तेमाल किया जाता है। हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान से जुड़े कुछ ग्रुप मिलिट्री ड्रोन खरीदने के लिए भी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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