'Twitter के मेड इन इंडिया विकल्प Koo पर यूज़र्स का डेटा खतरे में'

Twitter पर पोस्ट किए गए स्क्रीनशॉट के जरिए एक फ्रेंच हैकर ने दावा किया है कि Koo के यूज़र्स की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित नहीं है और इसे एक्सपोज़ किया जा सकता है।

'Twitter के मेड इन इंडिया विकल्प Koo पर यूज़र्स का डेटा खतरे में'

Koo ऐप को Google Play और App Store से डाउनलोड किया जा सकता है

ख़ास बातें
  • Koo को पिछले साल मार्च में लॉन्च किया गया था
  • हाल में कई मंत्रालयों और दिग्गजों द्वारा किया जा चुका है प्रोमोट
  • फ्रेंच हैकर ने दावा किया है कि Koo में यूज़र्स का निजी डेटा सुरक्षित नहीं
विज्ञापन
Koo, भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को लेकर एक हैकर का दावा है कि प्लेटफॉर्म यूज़र्स के निजी डेटा को सुरक्षित रखने में समर्थ नहीं है। Koo को Twitter का भारतीय विकल्प बताया जा रहा है और पिछले कुछ दिनों में ऐप को सरकार के कई मंत्रालयों, नेताओं और अन्य लोकप्रिय हस्थियों ने प्रोमोट भी किया है। यह वेबसाइट और ऐप दोनों रूप में उपलब्ध है। अब, एक फ्रेंच सुरक्षा शोधकर्ता रॉबर्ट बैप्टिस्ट (ट्विटर पर Elliot Alderson नाम) का कहना है कि Koo अपने यूज़र्स के व्यक्तिगत डेटा को एक्सपोज़ कर रहा है। बैपटिस्ट ने कहा कि उन्होंने ट्विटर पर यूज़र्स के अनुरोध पर Koo पर 30 मिनट बिताए और पाया कि माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म अपने यूज़र्स की संवेदनशील जानकारी जैसे कि ईमेल एड्रेस, नाम और जन्मदिन के साथ-साथ कई अन्य जानकारिया एक्सपोज़ कर रहा है। उन्होंने कू (Koo) के बारे में अपनी इस शोध को विस्तार से बताने के लिए कई ट्वीट्स पोस्ट किए। भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था, लेकिन Twitter और सरकार के बीच चल रहे मतभेद के चलते पिछले कुछ दिनों में Koo को अचानक काफी लोकप्रियता हासिल हो गई है।

Twitter पर पोस्ट किए गए स्क्रीनशॉट के जरिए बैपटिस्ट ने दावा किया है कि Koo के यूज़र्स की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित नहीं है और इसे एक्सपोज़ किया जा सकता है। हैकर ने ऐप को हैक कर यह साबित किया है कि Koo में यूज़र्स की ईमेल, जन्म तिथि, वैवाहिक स्टेटस जैसी कई निजी जानकारियों को आराम से एक्सपोज़ किया जा सकता है। कुछ अन्य स्क्रीनशॉट में, बैप्टिस्ट ने यह भी सुझाव दिया कि Koo के डोमेन को चीन में स्थित रजिस्ट्रेंट के साथ अमेरिका में रजिस्टर किया गया है।
 

मेड इन इंडिया माइक्रोब्लॉगिंग ऐप Koo को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyus Goyal) और रवि शंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) सहित कई सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रोमोट किया जा रहा है। इन्होंने हाल ही में ट्विटर पर एक पोस्ट के जरिए यूज़र्स को Koo में माइग्रेट होने के लिए आमंत्रित किया। India Post और MeiTY समेत कई मंत्रालयों और सरकारी कंपनियों ने भी Koo में अपने अकाउंट बना लिए हैं। बता दें कि Koo डेस्कटॉप, iOS और Android पर उपलब्ध है। इसकी एक बड़ी खासियत इसमें कई लोकल भाषाओं का सपोर्ट शामिल होना है। ऐप ने पिछले साल सरकार का डिज़िटल इंडिया AatmaNirbhar Bharat Innovate Challenge जीता था, जिसका उद्देश्य स्थानीय ऐप डेवलपर्स को प्रोत्साहित करना था। Koo को Aprameya Radhakrishna द्वारा विकसित किया गया है, जो इस प्लेटफॉर्म के सह-संस्थापक और सीईओ भी हैं।
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. गेमिंग फर्मों ने एंट्री फीस पर 28 प्रतिशत GST के खिलााफ सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार
  2. 9,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Redmi Note 17 Pro, जानें प्राइस, स्पेसिफिकेशंस
  3. 8,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Redmi Note 17, जानें प्राइस, स्पेसिफिकेशंस
  4. Realme C100x जल्द होगा भारत में लॉन्च, 8,000mAh की बैटरी
  5. iQOO 16 में मिल सकती है 8,500mAh की बैटरी, स्टीरियो स्पीकर्स
  6. Spam कॉल्स और मैसेज पर कसने वाली है लगाम! TRAI का Meta और Google के साथ बड़ा प्लान
  7. Nothing Phone (4b) की भारत में शुरू हुई बिक्री, जानें प्राइस, ऑफर्स
  8. StepX Neo लॉन्च! AI Agent वाला फोन जो खुद बुक करेगा फ्लाइट, करेगा ट्रांसलेशन और कई काम
  9. Redmi 17C 5G में हो सकती है 6,000mAh की बैटरी, Geekbench पर लिस्टिंग
  10. यूरोप और अमेरिकी मार्केट छोड़ रहा है OnePlus? इस हफ्ते हो सकता है बड़ा ऐलान
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »