सरकार की Vodafone Idea में हिस्सेदारी लेने की तैयारी

टेलीकॉम डिपार्टमेंट Vodafone Idea के स्टॉक का प्राइस 10 रुपये या इससे अधिक पर स्थिर होने के बाद हिस्सेदारी लेने के प्रपोजल पर आगे बढ़ेगा

सरकार की Vodafone Idea में हिस्सेदारी लेने की तैयारी

सरकार के पास कंपनी में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी

ख़ास बातें
  • कंपनी ने सरकार को हिस्सेदारी की पेशकश की थी
  • SEBI के नियम के तहत हिस्सेदारी मौजूदा वैल्यू पर ली जाती है
  • इस प्रपोजल को फाइनेंस मिनिस्ट्री ने जुलाई में क्लीयर कर दिया था
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केंद्र सरकार टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea के स्टॉक का प्राइस 10 रुपये या इससे अधिक पर जाने के बाद कंपनी में हिस्सेदारी लेगी। Vodafone Idea ने इस प्राइस पर सरकार को हिस्सेदारी की पेशकश की थी जिसे फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से जुलाई में स्वीकृति दी गई थी।

देश में टेलीकॉम कंपनियों को इससे पहले स्पेक्ट्रम की पेमेंट पर चार वर्ष के मोराटोरियम पर और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) की बकाया रकम को चुकाने के लिए इंटरेस्ट के बदले इक्विटी देने की पेशकश की गई थी। एक आधिकारिक सूत्र के हवाले से दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट Vodafone Idea के स्टॉक का प्राइस 10 रुपये या इससे अधिक पर स्थिर होने के बाद हिस्सेदारी लेने के प्रपोजल पर आगे बढ़ेगा। मार्केट रेगुलेटर SEBI के नियम के तहत हिस्सेदारी मौजूदा वैल्यू पर ली जाती है। कंपनी ने सरकार को इस प्राइस पर हिस्सेदारी की पेशकश की थी और इस प्रपोजल को फाइनेंस मिनिस्ट्री ने जुलाई में क्लीयर कर दिया था। 

कंपनी ने सरकार को बकाया लगभग 16,000 करोड़ रुपये के इंटरेस्ट की देनदारी को इक्विटी में कन्वर्ट करने का विकल्प चुना था। इसके बाद कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत से घटकर 50 प्रतिशत से कुछ अधिक रह जाएगी। सरकार के पास 33 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सरकार स्टॉक का प्राइस 10 रुपये या इससे अधिक होने पर ही इसमें स्टेक लेगी। गुरुवार को कंपनी का स्टॉक लगभग 9.60 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इस स्टॉक ने पिछले लगभग चार महीनों से 10 रुपये के प्राइस को पार नहीं किया है।

टेलीकॉम मार्केट में लगभग छह वर्ष पहले रिलायंस जियो के बिजनेस शुरू करने के बाद टैरिफ घटाने की प्रतिस्पर्धा शुरू हुई थी। इससे कुछ टेलीकॉम कंपनियों की वित्तीय स्थिति बहुत कमजोर हो गई थी। इसके बाद इस इंडस्ट्री में मर्जर और एक्विजिशन भी हुए थे। इसके अलावा AGR की बकाया रकम का बोझ भी इन कंपनियों पर पड़ा था। इससे Vodafone Idea लगभग दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई थी। सरकार की ओर से बकाया रकम चुकाने के लिए मोराटोरियम और इंटरेस्ट के भुगतान के लिए इक्विटी देने की पेशकश से कंपनी को कारोबार में बने रहने में मदद मिली थी।  
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डेविड डेलिमा

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