मोबाइल नेटवर्क मजबूत करने के लिए 11 अरब डॉलर से अधिक के स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगी सरकार

इस नीलामाी में 800, 900, 1,800, 2,100, 2,300, 2,500, 3,300 MHz और 26 GHz के बैंड्स में 10,523.1 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाएगा

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 9 फरवरी 2024 19:18 IST
ख़ास बातें
  • इसमें इनसॉल्वेंसी के प्रोसेस में शामिल कंपनियों का स्पेक्ट्रम भी होगा
  • इस नीलामी से सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी
  • पिछले कुछ महीनों में कॉल ड्रॉप की समस्या बढ़ी है

इस अतिरिक्त स्पेक्ट्रम से टेलीकॉम सर्विसेज की क्वालिटी में सुधार होगा और इसकी कवरेज बढ़ेगी

देश में मोबाइल नेटवर्क की क्वालिटी और कवरेज में सुधार के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग 11.6 अरब डॉलर से अधिक का स्पेक्ट्रम नीलाम करने की योजना बनाई है। इस नीलामाी में 800, 900, 1,800, 2,100, 2,300, 2,500, 3,300 MHz और 26 GHz के बैंड्स में 10,523.1 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाएगा। 

इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर, Anurag Thakur ने बताया कि इसमें इनसॉल्वेंसी के प्रोसेस में शामिल कंपनियों के पास मौजूद स्पेक्ट्रम भी शामिल होगा। इस नीलामी से सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और बजट घाटे को घटाने में आसानी होगी। इस अतिरिक्त स्पेक्ट्रम से टेलीकॉम सर्विसेज की क्वालिटी में सुधार होगा और इसकी कवरेज बढ़ेगी। इससे Bharti Airtel और Reliance Jio Infocomm जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अपनी सर्विसेज को मजबूत कर सकेंगी। 

टेलीकॉम इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा से इनके मार्जिन पर असर पड़ रहा है। इससे अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए बिड देने की इनकी क्षमता भी कम हो सकती है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने इस समस्या से निपटने की तैयारी की है। इसके साथ ही टेलीकॉम सेक्टर को ग्रोथ में मदद के लिए प्रतिस्पर्धा की समान स्थितियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। कॉल ड्रॉप के समाधान के लिए TRAI कड़े रेगुलेशन बना सकता है। 

इसके साथ ही क्वालिटी ऑफ सर्विसेज (QoS), सैटकॉम स्पेक्ट्रम के एलोकेशन और पिछले वर्ष संसद में पारित हुए टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट को लागू करने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। हाल ही में TRAI के नए चेयरमैन, Anil Kumar Lahoti ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा था कि टेलीकॉम रेगुलेटर की प्राथमिकताओं में QoS में सुधार करना और टेलीकॉम सेक्टर की ग्रोथ में मदद शामिल हैं। पिछले कुछ महीनों में कॉल ड्रॉप की समस्या बढ़ी है। इसके समाधान के लिए TRAI कड़े रेगुलेशन बनाने पर विचार कर रहा है। सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज उपलब्ध कराने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम के एलोकेशन में भी तेजी लाई जाएगी। बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल रिलायंस जियो, अमेरिकी बिलिनेयर Elon Musk की कंपनी Starlink और Amazon के Project Kuiper की भी देश में इस सर्विस को उपलब्ध कराने में दिलचस्पी है। रिलायंस जियो की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस JioSpaceFiber जल्द शुरू हो सकती है। पिछले वर्ष कंपनी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में सैटकॉम टेक्नोलॉजी को प्रदर्शित किया था।  
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
 

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