स्टडी में पता लगाया गया है कि ग्लेशियर्स के पतले होने और बर्फ की सिल्लियों का टूटने से 1997 के बाद से अंटार्कटिका की बर्फ की सिल्लियों के मास में 12 ट्रिलियन टन की कमी आई है, जो पिछले अनुमान से दोगुना है।
स्टडी के प्रमुख लेखक जेपीएल वैज्ञानिक चैड ग्रीन ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम बहुत भयावय हो सकते हैं
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