चांद पर उतरना आसान नहीं! टांगें टूट गईं दुनिया के पहले प्राइवेट मून लैंडर की, देखें फोटो

Odysseus Moon Lander : 14 फुट ओडीसियस लैंडर ने बीते गुरुवार को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास भूरे रंग की मिट्टी लैंडिंग की थी।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 29 फरवरी 2024 15:14 IST
ख़ास बातें
  • ओडीसियस लैंडर को करना पड़ा मुश्किलों को सामना
  • बीते दिनों चंंद्रमा पर उतरा था यह लैंडर
  • हार्ड लैंडिंग की वजह से एक या उससे ज्‍यादा पैर टूटे

ओडीसियस का टचडाउन स्‍मूद नहीं हुआ। 6 पैरों वाला लैंडर उम्‍मीद से ज्‍यादा तेजी के साथ नीचे की ओर आया और चंद्रमा पर ऐसी जगह से टकराया, जो थोड़ा ऊंची थी।

Photo Credit: @Int_Machines

Odysseus Moon Lander : पृथ्‍वी से लाखों किलोमीटर दूर चंद्रमा पर मिशन भेजना कोई मामूली बात नहीं है। अबतक चुनिंदा देश ही चांद पर अपना मिशन लैंड करा पाए हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, भारत और जापान शामिल हैं। अमेरिका ने पिछले सप्‍ताह रिकॉर्ड बनाया जब वहां की एक कंपनी इंटुएटिव मशीन्स का ओडीसियस लैंडर चांद पर उतरा। ऐसा करने वाला यह दुनिया का पहला प्राइवेट लैंडर है। हालांकि मिशन को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘ओडीसियस' ने चंद्रमा पर हार्ड लैंडिंग की, जिससे उसकी एक या उससे ज्‍यादा पैर टूट गए। 

14 फुट ओडीसियस लैंडर ने बीते गुरुवार को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास भूरे रंग की मिट्टी लैंडिंग की थी। इससे पहले साल 1972 में अमेरिका का कोई लैंडर चांद पर पहुंचा था। 

स्‍पेसडॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, ओडीसियस का टचडाउन स्‍मूद नहीं हुआ। 6 पैरों वाला लैंडर उम्‍मीद से ज्‍यादा तेजी के साथ नीचे की ओर आया और चंद्रमा पर ऐसी जगह से टकराया, जो थोड़ा ऊंची थी। कंपनी के सीईओ और को-फाउंडर स्टीव अल्टेमस ने कहा, इस वजह से हमने हार्ड लैंडिंग की। उन्होंने कहा कि लैंडिंग गियर में प्रेशर पड़ने के कारण संभवतः लैंडिंग गियर के एक या दो पैर टूट गए। 
 

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 12 डिग्री ढलान वाली जमीन पर ओडीसियस लगभग दो सेकंड तक सीधा खड़ा रहा। उसके बाद वह झुकने लगा और 30 डिग्री पर रुक गया। अच्‍छी बात यह है कि मिशन काम कर रहा है। कंपनी को कुछ तस्‍वीरें भी मिली हैं। उनमें से एक में टचडाउन के दौरान क्‍या हुआ, देखा जा सकता है। लैंडिंग पैर कितने डैमेज हुए, यह भी दिखाई दे रहा है। 
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यह मिशन रिकॉर्ड 8 दिनों में चांद पर पहुंच गया। 15 फरवरी को इसने स्‍पेसएक्‍स के फाल्‍कन-9 रॉकेट की मदद से उड़ान भरी थी। मिशन उसी रूट से चांद पर गया, जिस रूट से करीब 50 साल पहले अपोलो मिशन को भेजा गया था। अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा ने इस मिशन के लिए कंपनी के साथ करीब हजार करोड़ रुपये का कॉन्‍ट्रैक्‍ट किया था। 
 
 

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