शोधकर्ताओं का अंदाजा है कि इस विस्फोट से अंतरिक्ष में भारी मात्रा में मलबा फैल जाएगा। मलबे का कुछ हिस्सा कई दिनों बाद पृथ्वी पर गिर सकता है।
Photo Credit: NASA
Asteroid 2024 YR4 को लेकर कहा गया है कि 22 दिसंबर 2032 को यह चंद्रमा से टकरा सकता है।
एस्टरॉयड ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो किसी भी वक्त धरती के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। ये चट्टानों के टुकड़े आकार में 500 फीट तक भी बड़े हो सकते हैं। सोचिए कि 500 फीट बड़ा पहाड़ धरती पर आकर गिरे तो कैसी तबाही होगी! ऐसा ही एक खतरा अंतरिक्ष में मंडरा रहा है जो बहुत दूर नहीं है। NASA के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक खतरनाक एस्टरॉयड का पता लगाया है। इसका नाम एस्टरॉयड 2024 YR4 है। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एस्टरॉयड 2032 में चंद्रमा से टकरा सकता है। क्या होगा इस टक्कर का असर, पृथ्वी पर कितना होगा प्रभाव, आइए जानते हैं।
Asteroid 2024 YR4 को पहली बार 27 दिसंबर 2024 में देखा गया था। यह एस्टरॉयड साइज में 130 फीट से लेकर 300 फीट तक बड़ा हो सकता है। यह नासा की ऑटोमेटेड Sentry रिस्क लिस्ट में स्पॉट किया गया था। Sentry रिस्क लिस्ट में धरती के पास मंडरा रहे वे सभी एस्टरॉयड शामिल होते हैं जिनके कभी न कभी धरती से टकराने की संभावना जीरो से ज्यादा होती है। लेकिन Asteroid 2024 YR4 के चांद से टकराने की आशंका जताई गई है। इसके बारे में कहा गया है कि इसके चांद से टकराने की संभावना 4 प्रतिशत है।
2032 में होगी टक्कर?
Asteroid 2024 YR4 को लेकर कहा गया है कि 22 दिसंबर 2032 को यह चंद्रमा से टकरा सकता है। शोधकर्ता कह रहे हैं कि इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है। Tsinghua यूनिवर्सिटी के Yifan He द्वारा रिलीज किए गए एक पेपर में कहा गया है कि इस टक्कर से एक मध्यम आकार के थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट के बराबर ऊर्जा निकलेगी। जिससे यह आधुनिक समय में देखी गई सबसे शक्तिशाली चंद्र टक्कर बन जाएगी। अगर एस्टरॉयड टकराया तो चांद पर एक किलोमीटर चौड़ा गड्ढा (crater) बन जाएगा जिससे चंद्रकंप पैदा होगा। यह 5 मेग्नीट्यूड का हो सकता है। इसका फायदा चांद के अंदरूनी स्ट्रक्चर को स्टडी करने में हो सकता है।
आसमान से बरसेगी आफत
शोधकर्ताओं का अंदाजा है कि इस विस्फोट से अंतरिक्ष में भारी मात्रा में मलबा फैल जाएगा। मलबे का कुछ हिस्सा कई दिनों बाद पृथ्वी पर गिर सकता है। अंतरिक्ष से उल्का पिंड बरसेंगे जो नंगी आंखों से देखे जा सकेंगे। सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में दिखेगा। सिमुलेशन से पता चलता है कि अपने चरम पर प्रति घंटे लाखों उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकते हैं।
सैटेलाइट्स को नुकसान
इस घटना से गंभीर खतरे भी जुड़े हो सकते हैं। गिरते हुए मलबे से संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है। अंतरिक्ष एजेंसियां चेतावनी देती हैं कि इसके टुकड़े पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे सैटेलाइट्स के लिए खतरा बन सकते हैं। इससे केसलर सिंड्रोम नामक एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो सकती है, जो ग्लोबल कम्युनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम को खराब कर सकती है।
अंतरिक्ष एजेंसियों की तैयारी
संबंधित खतरे को देखते हुए अंतरिक्ष एजेंसियां इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि क्या इस एस्टरॉयड को मोड़ने के लिए कोई मिशन शुरू किया जाए? वैज्ञानिकों का कहना है कि यह निर्णय पृथ्वी की सुरक्षा के लिए अहम हो सकता है। साथ ही असाधारण प्राकृतिक प्रयोग को देखने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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