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पहली बार सामने आई चीन के स्‍पेस स्‍टेशन की तस्‍वीर, ISS से 20% बड़ा, जानें बाकी खूबियांं

एचडी कैमरे से ली गई तस्‍वीरों में देखा जा सकता है कि चीन अब अंतरिक्ष की दुनिया में कितना आगे निकल गया है।

पहली बार सामने आई चीन के स्‍पेस स्‍टेशन की तस्‍वीर, ISS से 20% बड़ा, जानें बाकी खूबियांं

Photo Credit: CMSE

चीन ने अपने दम पर स्‍पेस स्‍टेशन को बनाया है, जो इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) से मुकाबला करता है।

ख़ास बातें
  • चीन के स्‍पेस स्‍टेशन की तस्‍वीर आई सामने
  • साल 2021 से ऑपरेशनल है यह स्‍पेस स्‍टेशन
  • अमेरिका और रूस के आईएसएस से 20 फीसदी बड़ा है
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चीन का स्‍पेस स्‍टेशन पूरी तरह से ऑपरेशनल है। पहली बार इसकी ऐसी तस्‍वीरें सामने आई हैं, जिनमें तियांगोंग स्‍पेस स्टेशन (Tiangong space station) की पूरी संरचना दिखाई दे रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के  शेनझोउ 16 मिशन के क्रू ने पृथ्‍वी पर लौटते समय इस स्‍पेस स्‍टेशन की शानदार तस्‍वीरें लीं। एचडी कैमरे से ली गई तस्‍वीरों में देखा जा सकता है कि चीन अब अंतरिक्ष की दुनिया में कितना आगे निकल गया है। उसने अपने दम पर स्‍पेस स्‍टेशन को बनाया है, जो इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) से मुकाबला करता है। 

स्‍पेसडॉटकॉम की रिपोर्ट कहती है कि शेनझोउ 16 टीम ने 26 अक्‍टूबर को चीनी स्‍पेस स्‍टेशन का कंट्रोल शेनझोउ 17 क्रू के हाथ में सौंपा और तीन चीनी अंतरिक्ष यात्री पृथ्‍वी के लिए रवाना हुए। उनमें कमांडर जिंग हैपेंग, झू यांगझू और गुई हाइचाओ शामिल थे। उसी टीम ने चीनी स्‍पेस स्‍टेशन की तस्‍वीरें ली। 

रिपोर्ट के अनुसार, यह स्‍पेस स्‍टेशन पृथ्‍वी से 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। साल 2021 में पहली बार तियांगोंग स्‍पेस स्‍टेशन पर अंतरिक्ष यात्रियों का एक दल पहुंचा था, जिसने वहां 90 दिन बिताए थे। हालांकि तब स्‍पेस स्‍टेशन का पहला भाग पूरा हुआ था। स्‍पेस स्‍टेशन की दूसरी और तीसरी यूनिट्स को पिछले साल और इस साल लॉन्‍च किया गया। 

तियांगोंग स्‍पेस स्टेशन एक 55 मीटर लंबा स्‍टेशन है। इसका वजन 77 टन है। यह अमेरिका और रूस के दबदबे वाले इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से 20 फीसदी बड़ा है। इस स्‍पेस स्‍टेशन पर भी कई प्रयोग किए जा रहे हैं। चीन की अंतरिक्ष एजेंसी कम से कम एक दशक तक इस स्‍पेस स्‍टेशन को ऑपरेट करना चाहती है। 

अपना स्‍पेस स्‍टेशन बनाकर चीन ने बाकी देशों खासतौर पर अमेरिका को चुनौती दी है। याद रहे कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में चीन को भागीदार नहीं बनाया गया था, जिसके बाद उसने अपना स्‍पेस स्‍टेशन बनाकर दम लिया। भारत भी स्‍पेस स्‍टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ा है। उसने साल 2040 का लक्ष्‍य तय किया है। 

 
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