इसे कृत्रिम सूर्य इसलिए कहा जाता है, क्योंकि मशीन का सेटअप सूर्य के अंदर असलियत में होने वाले परमाणु रिएक्शंस की नकल करता है।
Photo Credit: Screenshot/Xinhua
ये प्रयोग वैज्ञानिकों को ‘असीमित क्लीन एनर्जी’ के करीब ला सकता है।
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