Starlink क्या है, कैसे करता है काम? भारत में इसकी कीमत से लेकर फायदे–कमियों तक, यहां समझें सब कुछ

Elon Musk की Starlink सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में एंट्री के करीब है। जानें यह कैसे काम करती है, संभावित कीमत क्या होगी और इसके फायदे-कमियां क्या हैं।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 10 दिसंबर 2025 17:28 IST
ख़ास बातें
  • Starlink भारत में सैटेलाइट-बेस्ड हाई-स्पीड इंटरनेट देने को तैयार
  • मंथली प्लान 2,500-3,500 रुपये, हार्डवेयर लगभग 25-30 हजार होने की उम्मीद
  • दूर-दराज इलाकों में ब्रॉडबैंड का मजबूत ऑप्शन बन सकता है

Photo Credit: Unsplash/ ANIRUDH

दुनिया हाई-स्पीड इंटरनेट की ओर बढ़ रही है, लेकिन अब यह रेस सिर्फ फाइबर और 5G तक सीमित नहीं है। Elon Musk की SpaceX की सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink को लेकर भारत में भी दिलचस्पी अचानक बढ़ गई है - खासकर तब, जब रिपोर्ट्स ने इसके संभावित भारतीय प्राइसिंग की झलक दिखानी शुरू कर दी। सरकारी मंजूरी अभी बाकी है, लेकिन चर्चा इसका इंतजार नहीं कर रही। अभी तक फाइनल प्राइसिंग का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह सर्विस असल में क्या है, कैसे काम करती है, भारत में इसकी कीमत क्या हो सकती है और इसमें कौन-सी खूबियां और कमियां हैं, इसका अंदाजा अन्य देशों में चल रही इस सर्विस से लगाया जा सकता है। तो बिना देरी किए चलिए सब कुछ जानते हैं।

Starlink क्या है?

Starlink, Elon Musk की SpaceX कंपनी का प्रोजेक्ट है, जो दुनिया को सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। इसका लक्ष्य है - जगह कोई भी हो, इंटरनेट हमेशा उपलब्ध हो, यानी हिल स्टेशन, जंगल, गांव, समुद्र, एयरलाइन आदि। Starlink अपनी लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स की मदद से यह इंटरनेट देता है। अभी तक SpaceX 6,000 से ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है।

Starlink कैसे काम करता है?

इसके लिए तीन चीजें चाहिए होती हैं:

  • Starlink डिश - एक फ्लैट एंटेना जो घर या छत पर लगाया जाता है
  • Wi-Fi Router - इंटरनेट को घर में शेयर करने के लिए
  • LEO सैटेलाइट नेटवर्क - यह डिश सीधे स्पेस में मौजूद सैटेलाइट को सिग्नल भेजती और प्राप्त करती है

Starlink की खासियत है कि इसकी सैटेलाइट्स बहुत नीचे (550 km ऊंचाई) पर चलती हैं। यही वजह है कि लेटेंसी कम रहती है, स्पीड फाइबर जैसी महसूस हो सकती है और कनेक्शन खराब मौसम में भी स्थिर रह सकता है।

भारत में Starlink की कीमत कितनी हो सकती है?

अभी Starlink ने भारत के लिए फाइनल ऑफिशियल प्राइस घोषित नहीं किया है। हाल ही में कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर 8,600 रुपये का प्राइस दिखाई दिया, जिसे बाद में कंपनी ने डमी प्राइस कहा और वेबसाइट पर ग्लिच के कारण यह दिखाई देने लगा था। बाद में ET की रिपोर्ट सामने आई, जिसके मुताबिक, Starlink की मंथली कीमत 2,500-3,500 रुपये के बीच हो सकती है। वहीं, हार्डवेयर किट (डिश + राउटर) की कीमत लगभग 25,000-30,000 रुपये रखे जाने की उम्मीद है।

Starlink की स्पीड कैसी होगी?

ग्लोबल डेटा के आधार पर Starlink आमतौर 50-220 Mbps स्पीड देता है, जिसमें 20-40 ms की लेटेंसी हो सकती है और अपलोड स्पीड 5-20 Mbps हो सकती है। भारत में स्पीड नेटवर्क डेंसिटी और लोकेशन के हिसाब से तय होगी।

Starlink के फायदे (Pros)

  • जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं, वहां भी इंटरनेट: दूर-दराज गांव, पहाड़, जंगल, रेगिस्तान - Starlink हर जगह पहुंच सकता है।
  • फाइबर ब्रॉडबैंड की तरह स्थिर स्पीड: LEO सैटेलाइट्स जमीन के करीब होती हैं, इसलिए लेटेंसी काफी कम होती है।
  • Installation आसान: डिश प्लग-एंड-प्ले है, बस आसमान दिखना चाहिए।
  • Disaster Zones में भी काम करता है: नेटवर्क कट जाए, फाइबर टूट जाए - Starlink चलता रहता है।
  • Airplane / Cruise / Army जैसे सेगमेंट के लिए बेहद उपयोगी: Starlink Aviation पहले से कई देशों में चल रहा है।

Starlink की कमियां (Cons)

  • मौसम का असर: बारिश, घना कोहरा, बर्फ की स्थिति में कनेक्शन थोड़े समय के लिए धीमा हो सकता है।
  • महंगा है: भारत में फाइबर ब्रॉडबैंड औसतन 500-700 रुपये प्रति महीना में मिल जाता है। Starlink का हार्डवेयर + सब्सक्रिप्शन दोनों काफी महंगे हैं।
  • भारी डेटा यूजर्स के लिए कम सही: 4K/8K स्ट्रीमिंग, गेमिंग या बड़े डाउनलोड लगातार करने पर स्पीड में थ्रॉटलिंग देखी जा सकती है।

क्या Starlink भारत में ब्रॉडबैंड को रिप्लेस कर देगा?

संभावना कम है, लेकिन यह जहां ब्रॉडबैंड पहुंच ही नहीं सकता, वहां सबसे मजबूत ऑप्शन बन सकता है। इसके अलावा, रिमोट वर्क, पहाड़ी गांवों में स्कूल, रिसर्च सेंटर्स, खेती/IoT, आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में Starlink एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। Starlink के भारत में अगले साल लॉन्च होने की पूरी संभावना है।

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