रिपोर्ट कहती है कि कंज्यूमर की शिकायतों को सुलझाने वाले संगठनों ने तर्क दिया कि कंपनियां अपने 50Mbps या 100Mbps फाइबर-टू-द-नोड (FTTN) प्लान में दावा की गई इंटरनेट स्पीड देने में विफल रहीं।
तीनों कंपनियों पर कुल 33.5 मिलियन डॉलर (करीब 272 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया है
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