क्रिप्टो फर्मों पर ED के छापे, 2,500 करोड़ रुपये के गैर कानूनी मनी ट्रांसफर का है आरोप

इस मामले की जांच में फंड के ट्रांसफर के लिए बड़ी मात्रा में क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस, टैक्स हैवेन कहे जाने वाले देशों में शेल फर्मों और विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल पाया गया है

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 19 जून 2026 22:51 IST
ख़ास बातें
  • ये फर्में क्रिप्टोकरेंसीज के जरिए विदेश में फंड भेज रही थी
  • क्रिप्टो से जुड़ी इन फर्मों ने RBI के नियमों का पालन नहीं किया है
  • ED की जांच में गैर कानूनी क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस का पता चला है

ये फर्में कथित तौर पर विदेश में गैर कानूनी तरीके से फंड ट्रांसफर कर रही थी

पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसीज के जरिए विदेश में गैर कानूनी तरीके से बड़ी रकम भेजने के कई मामले सामने आए हैं। एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के जरिए कथित तौर पर विदेश में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांसफर की जांच में बेंगलुरु में कुछ स्थानों पर छापे मारे हैं। 

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के सेक्शन 37 के तहत ये छापे 17 जून को पांच फर्मों से जुड़े परिसरों पर मारे गए हैं। क्रिप्टो से जुड़ी इन फर्मों में Transak Technology India Pvt Ltd, Carretx Technologies Pvt Ltd, Mokshagna Technologies Pvt Ltd, Buyhatke Internet Pvt Ltd और Abhibha Technologies Pvt Ltd शामिल हैं। ये फर्में Transak, Carret और Xpat जैसे प्लेटफॉर्म्स को ऑपरेट कर रही थी। 

देश में यूजर्स को रुपये को USDT जैसे स्टेबलकॉइन्स सहित क्रिप्टोकरेंसीज में कन्वर्ट करने और क्रिप्टोकरेंसीज को रुपये में कन्वर्ट करने की सर्विस ये फर्में उपलब्ध करा रही थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से जरूरी अनुमतियां हासिल किए बिना ये फर्में विदेश में ट्रांजैक्शंस को प्रोसेस कर रही थी। ED का आरोप है कि इन फर्मों ने पर्पज कोड और फॉरेन इनवर्ड रेमिटेंस सर्टिफिकेट सहित RBI की ओर से अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया है। इस मामले की जांच में फंड के ट्रांसफर के लिए बड़ी मात्रा में क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस, टैक्स हैवेन कहे जाने वाले देशों में शेल फर्मों और विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल पाया गया है। ED ने छापों के दौरान कुछ फर्मों से जुड़े बैंक एकाउंट्स को फ्रीज किया है। 

पिछले वर्ष दिसंबर में ED ने क्रिप्टो स्कैम के एक बड़े मामले में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कई स्थानों पर छापे मारे थे। इस मामले में कथित तौर पर जाली क्रिप्टोकरेंसी पॉन्जी स्कीम और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कैम से कई इनवेस्टर्स के साथ लगभग 2,300 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया गया था। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस मामले की जांच की थी। इसमें इनवेस्टर्स को बहुत अधिक रिटर्न का लालच दिया जाता था। इसमें जाली टोकन के प्राइसेज में हेरफर की जाती थी। ये आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए अपराध से मिली रकम को बिल्डर्स, जाली फर्मों और अपने रिश्तेदारों के एकाउंट्स के जरिए खपाते थे। 
 

 

ये भी पढ़ेंभारतीय एक्सचेंजों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें

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