Chandrayaan 3 : लॉन्‍च पैड को रवाना हुआ चंद्रयान मिशन, 7 दिन बाद रचेगा इतिहास! देखें तस्‍वीरें

Chandrayaan 3 : चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर को ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ में सफलता नहीं मिल पाई थी। चंद्रयान-3 मिशन का मकसद अधूरे रह गए उस काम को पूरा करना है।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 7 जुलाई 2023 12:03 IST
ख़ास बातें
  • मिशन को 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्‍च किया जाएगा
  • 23 या 24 अगस्त को होगी सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश
  • लैंडर का मिशन काल एक चंद्र दिवस होगा

तस्‍वीरों में LVM3 M4 वीकल को लॉन्च पैड पर ले जाते हुए देखा जा सकता है। इसी रॉकेट की मदद से चंद्रयान-3 अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा।

Photo Credit: ISRO

भारत के चंद्रयान 3 (Chandrayaan-3) मिशन की तैयारियां अपने अंतिम दौर में हैं। गुरुवार को इसरो (ISRO) ने मिशन लॉन्‍च तारीख भी कन्‍फर्म कर दी। बताया कि मिशन को 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्‍च किया जाएगा। इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 का लैंडर चंद्रमा की सतह पर 23 या 24 अगस्त को ‘सॉफ्ट लैंडिंग' कर सकता है। स्‍पेस एजेंसी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस मिशन से जुड़ी तस्‍वीरें भी शेयर की हैं। तस्‍वीरों में LVM3 M4 वीकल को लॉन्च पैड पर ले जाते हुए देखा जा सकता है। इसी रॉकेट की मदद से चंद्रयान-3 अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा।  
 
चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर को ‘सॉफ्ट लैंडिंग' में सफलता नहीं मिल पाई थी। चंद्रयान-3 मिशन का मकसद अधूरे रह गए उस काम को पूरा करना है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा है कि 23 या 24 अगस्त को चंद्रमा पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग' की कोशिश की जाएगी। 

इसरो के अधिकारियों ने बताया कि लैंडर का मिशन काल एक चंद्र दिवस होगा। यह पृथ्वी पर 14 दिनों के बराबर है। उन्होंने कहा कि सॉफ्ट लैंडिंग की तारीख इस आधार पर तय की जाती है कि चंद्रमा पर सूर्योदय कब होता है। लैंडिंग करते समय चंद्रमा पर सूर्य की रोशनी होनी चाहिए। गौरतलब है कि चंद्रमा पर 14-15 दिन तक सूर्य की रोशनी होती है।
इस बीच, इसरो सोशल मीडिया पर मिशन से जुड़ी तस्‍वीरें शेयर कर रही है। हाल में उसने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चंद्रयान-3 की इनकैप्सुलेटेड असेंबली को LVM3 के साथ जोड़ते हुए दिखाया था। अब LVM3 M4 वीकल को लॉन्च पैड पर ले जाते हुए तस्‍वीरें शेयर की हैं। 

इस साल मार्च में इसरो ने चंद्रयान-3 से जुड़े जरूरी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसरो का दावा है कि अगर किसी वजह से लैंडिंग में परेशानी आती है तो उसने मिशन को ऐसे डिजाइन किया है कि दूसरी जगह पर चंद्रयान-3 को लैंड कराया जा सकता है। 
 
 

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