Cyber Crime Frauds

Cyber Crime Frauds - ख़बरें

  • ChatGPT बना ठगो का नया हथियार! AI से सरकारी वेबसाइट बनाकर लाखों की ठगी
    बिजनौर पुलिस ने HSRP बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गैंग 15 राज्यों में दर्ज 29 साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ा है। आरोपियों ने GoDaddy के जरिए डोमेन लेकर सरकारी HSRP पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें तैयार की थीं। पुलिस का कहना है कि वेबसाइट के डिजाइन और तकनीकी काम में ChatGPT समेत अन्य AI टूल्स का भी इस्तेमाल किया गया। मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है।
  • Digital Arrest में ₹4 हजार करोड़ से ज्यादा गंवा चुके हैं भारतीय, आप भी भूलकर न करें ये गलतियां
    भारत में Digital Arrest Scam तेजी से बढ़ता साइबर अपराध बन गया है। सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 2022 से मई 2026 के बीच इस तरह की ठगी से जुड़े 2.97 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए और लोगों को 4,057.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। साइबर क्राइम एजेंसियां साफ कर चुकी हैं कि भारत में Digital Arrest जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहना जरूरी है।
  • WhatsApp Username विवाद के बीच श्रीधर वेम्बु का यू-टर्न, Arattai से हटेगा फीचर
    WhatsApp के Username फीचर को लेकर भारत सरकार की ओर से उठाए गए सवालों के बीच Zoho ने अपने मैसेजिंग ऐप Arattai से Username आधारित अकाउंट फीचर हटाने का फैसला किया है। Zoho के को-फाउंडर Sridhar Vembu ने कहा कि यह कदम रेगुलेटरी बदलावों के अनुपालन के लिए उठाया जा रहा है। हालांकि सरकार ने Username फीचर पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन Meta, Telegram और Signal से साइबर फ्रॉड और सिक्योरिटी जोखिमों को लेकर जवाब मांगा गया है। WhatsApp का कहना है कि उसने Username फीचर के साथ कई सिक्योरिटी उपाय भी जोड़े हैं।
  • सरकार दे रही फ्री Cyber Security Course, सिर्फ 2.5 घंटे में मिलेगा सर्टिफिकेट, ऐसे करें अप्लाई
    भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने फ्री ऑनलाइन Cyber Security Course शुरू किया है। यह कोर्स गृह मंत्रालय के तहत तैयार किया गया है और इसका मकसद लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके सिखाना है। कोर्स में फेक लिंक, स्कैम कॉल्स, डिजिटल पेमेंट सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। इसे करीब 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकता है और सफल प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
  • 81 साल के पिता ने बेटे को बचाया ‘डिजिटल अरेस्ट’ से, ऐन वक्त पर रोकी ₹12 लाख की ठगी
    पुणे के निगडी इलाके में एक 81 वर्षीय व्यक्ति ने अपने बेटे को 12 लाख रुपये की साइबर ठगी से बचा लिया। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और वीडियो कॉल के जरिए पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की। इंजीनियर को शक होने पर उन्होंने अपने पिता को जानकारी दी, जिन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस के पहुंचते ही ठगों ने कॉल काट दी। इस घटना में साइबर अवेयरनेस सेशन और मोबाइल ऐप की जानकारी ने अहम भूमिका निभाई।
  • WhatsApp Web से करोड़ों की ठगी, CEOs के नाम पर बड़ा साइबर स्कैम!
    हैदराबाद में साइबर ठगों ने एक नया और खतरनाक फ्रॉड तरीका अपनाया है, जिसमें बड़ी कंपनियों के CEO और CFO के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, इस स्कैम की शुरुआत फिशिंग ईमेल से होती है, जिसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही सिस्टम हैक हो जाता है। इसके बाद हैकर्स WhatsApp Web के जरिए अधिकारियों के अकाउंट से मैसेज भेजकर अकाउंटेंट्स को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। चूंकि मैसेज असली अकाउंट से आते हैं, कर्मचारी उन्हें सही मान लेते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।
  • YouTube वीडियो से शुरू हुआ खेल, नकली ऐप और WhatsApp ग्रुप ने कराई 11.8 लाख की ठगी
    एक महिला ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम का शिकार हो गई, जिसमें उससे 11.8 लाख रुपये ठग लिए गए। शिकायत के मुताबिक उसने YouTube पर एक ट्रेडिंग वीडियो देखा, जिसके बाद उसे WhatsApp ग्रुप में जोड़ लिया गया। यहां उसे निवेश के लिए प्रेरित किया गया और अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। महिला ने 6 मार्च से 14 मार्च के बीच कई किश्तों में रकम जमा की, लेकिन उसे कोई रिटर्न नहीं मिला। मामले में IT Act और BNS के तहत केस दर्ज किया गया है।
  • AI स्कैम गैंग्स की हिट लिस्ट में भारत दूसरे नंबर पर, Meta की इस रिपोर्ट में सामने आया पूरा फ्रॉड गेम
    Meta की 2026 Adversarial Threat Report में बताया गया है कि ऑनलाइन स्कैम अब पहले से ज्यादा एडवांस हो चुके हैं और इनमें AI का बड़ा रोल है। स्कैमर्स अब फेक प्रोफाइल, डीपफेक और नेचुरल बातचीत के जरिए लोगों को आसानी से झांसा दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये ठगी अब एक पूरी इंडस्ट्री की तरह काम कर रही है, जिसमें अलग-अलग स्टेज पर प्लानिंग की जाती है। साउथईस्ट एशिया से ऑपरेट होने वाले बड़े स्कैम नेटवर्क्स भारत समेत कई देशों को टारगेट कर रहे हैं। इसके अलावा फेक रेंटल और फेक फ्यूनरल जैसे नए स्कैम भी सामने आए हैं।
  • Fake Traffic Challan Scam: 500 रुपये बचाने गए और गंवा दिए लाखों, ऐसे बचें इस नए साइबर स्कैम से
    देश में फेक ट्रैफिक चालान स्कैम तेजी से फैल रहा है, जिसमें साइबर ठग नकली मैसेज भेजकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के मामलों में पुणे के एक दुकानदार से करीब 2.76 लाख रुपये और दिल्ली के एक व्यक्ति से 2.49 लाख रुपये की ठगी हुई। इन मैसेज में चालान भरने के नाम पर लिंक दिया जाता है, जिस पर क्लिक करने से यूजर की बैंकिंग जानकारी चोरी हो जाती है। पुलिस के मुताबिक कई मामलों में रिमोट एक्सेस के जरिए फोन का कंट्रोल भी ले लिया जाता है। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
  • क्रिप्टो स्कैम में हैदराबाद के कंसल्टेंट के साथ 3.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी
    हैदराबाद के कोंडापुर के रहने वाले इस पीड़ित ने बताया है कि दो वर्ष पहले उनसे एक जालसाज ने संपर्क कर एक पोर्टल pc.omnifxpro.com पर एकाउंट खोलने के लिए कहा था। " उन्होंने बताया कि खुद को नव्या बताने वाली यह जालसाज बाद में काजल मिश्रा के नाम के साथ ऑनलाइन दिखी थी। इसके बाद उनसे खुद को महिला के तौर पर दिखाने वाले दो अन्य जालसाजों ने भी ठगी की है।
  • Google पर डॉक्टर का नंबर खोजने से उड़ गए 18 लाख! साइबर फ्रॉड का नया तरीका
    उत्तर प्रदेश के अनुपशहर में साइबर ठगों ने एक बीमार व्यक्ति और उसकी पत्नी से करीब 18.61 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने डॉक्टर का नंबर खोजने के लिए Google पर सर्च किया था, जिसके बाद ठगों ने खुद को डॉक्टर से जुड़ा बताकर ‘Doctor Appointment’ नाम का ऐप डाउनलोड कराया। जांच के मुताबिक, ऐप को दी गई परमिशन के जरिए आरोपियों ने मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया और बैंक खातों से कई ट्रांजेक्शन कर पैसे निकाल लिए। पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता कई दिनों बाद चला।
  • WinGo साइबर फ्रॉड केस ने खोली आंखें, कहीं आप भी न बन जाएं स्कैम का हिस्सा, इन बातों का रखें ध्यान
    WinGo ऐप से जुड़े साइबर फ्रॉड के खुलासे के बाद पुलिस और सरकार ने आम यूजर्स को सतर्क रहने की सलाह दी है। जांच में सामने आया है कि आसान कमाई का दावा करने वाले ऐप्स यूजर्स के मोबाइल नंबर और SMS एक्सेस का दुरुपयोग कर साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में अनजाने यूजर्स भी स्कैम नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं। सरकार ने संदिग्ध ऐप्स से दूर रहने, अनावश्यक परमिशन न देने और किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
  • क्या आप भी Mobile पर ये App यूज कर रहे हैं? 1 ऐप, हजारों नंबर और करोड़ों का स्कैम!
    गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने ई-चालान सिस्टम से जुड़े एक साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान WinGo नाम के एक ऐप को लेकर गंभीर खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, यह ऐप कथित तौर पर “टेलीकॉम म्यूल ऐज़ ए सर्विस” मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें आम लोगों के मोबाइल नंबर और SIM कार्ड का इस्तेमाल कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता है। यूजर्स को आसान कमाई का लालच देकर उनके नंबर से फर्जी SMS भेजे जाते हैं। पुलिस ने ऐसे ऐप्स से दूर रहने की सलाह दी है।
  • क्या है किल स्विच फीचर?, भारत सरकार लाने का कर रही विचार, ऑनलाइन स्कैम से करेगा तुरंत बचाव
    गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा डिजिटल अरेस्ट के खतरे की जांच के लिए गठित एक हाई लेवल कमेटी किल स्विच लाने पर विचार कर रही है, जो डिजिटल स्कैम होने की संभावना पर यूजर्स को अपने अकाउंट से सभी वित्तीय ट्रांजेक्शन को तुरंत ब्लॉक करने की अनुमति देगा। ऑनलाइन स्कैम के मामले तेजी के साथ बढ़ते जा रहे हैं और लोगों को रोजाना लाखों से करोड़ों रुपये तक का चूना लग रहा है।
  • एक टच में डिजिटल अरेस्ट, स्कैम से बचाएगा 'Kill Switch', UPI और बैंक ऐप्स में मिलेगा इमरजेंसी बटन
    डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार एक बड़े तकनीकी समाधान पर काम कर रही है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित हाई-लेवल कमेटी UPI और बैंकिंग ऐप्स में एक ‘किल स्विच’ फीचर जोड़ने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह इमरजेंसी बटन किसी संभावित ऑनलाइन ठगी के दौरान यूजर को तुरंत सभी बैंक ट्रांजैक्शन्स रोकने की सुविधा देगा। इस कदम का मकसद उन मामलों को रोकना है, जहां स्कैमर्स वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस पहचान के जरिए लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

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