भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए किसी प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर के पब्लिक नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहती है।
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भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए निजी टेलीकॉम ऑपरेटर के भरोसे नहीं रहती है।
मोबाइल नेटवर्क जाने से क्या-क्या हो सकता है? आप कहेंगे इंटरनेट नहीं चलेगा, कॉल नहीं होगी, पेमेंट्स नहीं होंगीं! लेकिन क्या आप जानते हैं मोबाइल नेटवर्क देश के पूरे रेल नेटवर्क को ठप कर सकता है? ऑस्ट्रेलिया में ऐसा ही हुआ है। यहां देश के सबसे बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर का नेटवर्क चले जाने से वो हुआ जो किसी ने नहीं सोचा था। मोबाइल नेटवर्क न रहने से ट्रेनें चलना बंद हो गईं, लोगों के काम अटक गए और हालात काफी बिगड़ गए, कैसे? आइए जानते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर Telstra में नेटवर्क की बत्ती गुल हुई तो हालात बहुत बिगड़ गए। यह सिर्फ मोबाइल इंटरनेट, कॉलिंग, डिटिजल पेमेंट्स पर असर नहीं था, बल्कि इसने देश की रेल सेवा को ही ठप कर दिया। BBC की रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क चले जाने से सेंट्रल कंट्रोल सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी में आई बड़ी खराबी के कारण ट्रेन सेवाएँ रद्द करनी पड़ीं। हजारों ग्राहकों का मोबाइल नेटवर्क कट गया। नतीजा ये हुआ कि इमरजेंसी कॉल तक कनेक्ट नहीं हो पाईं।
मोबाइल नेटवर्क के बंद होने से ट्रेन नेटवर्क कैसे हुए ठप? इस बात का जवाब एक्सपर्ट्स ने दिया है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, ABC News को दिए बयान में RMIT यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर Mark Gregory ने इसका कारण बताते हुए कहा कि ट्रेनें यहां सेल्युलर नेटवर्क के भरोसे थीं। ये कंट्रोल सेंटर से मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से जुड़ी रहती हैं। जब टेलेस्ट्रा के 4G नेटवर्क में खराबी आई तो कंट्रोल सेंटर से ट्रेनों का संपर्क टूट गया। इससे सेफ्टी लिंक खत्म हो गया और ट्रेनों का ऑपरेशन पूरी तरह से रोकना पड़ गया।
उन्होंने बताया कि डेटा सेंटरों में मौजूद कंट्रोल सिस्टम लगातार ट्रेनों से सिग्नल मिलने का इंतज़ार करते रहते हैं। जब ये मैसेज मिलने बंद हो जाते हैं, तो सिस्टम सुरक्षा से जुड़ी समस्या को रेड फ्लैग कर देता है। इससे ट्रेनों तक कोई मैसेज नहीं पहुंचता है। इसलिए संपर्क बहाल होने तक ऑपरेशन रोक दिया जाता है।
Telstra के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर माइकल एकलैंड ने इस समस्या के लिए माफी माँगी। आउटेज बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4:30 बजे शुरू हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 12 घंटे बाद सेवाएँ पूरी तरह बहाल कर दी गईं। एकलैंड ने कहा कि इसकी वजह सिडनी और मेलबर्न के डेटा सेंटरों में टाइम-कीपिंग सर्वर से जुड़ी सॉफ्टवेयर की खराबी थी। यह कोई साइबर हमला नहीं था। समस्या इतनी गंभीर थी कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने इसे बहुत ही चिंताजनक बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए किसी प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर के पब्लिक नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहती है। बजाए इसके, वह अपना स्वयं का डेडिकेटेड कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर चलती है। रेलवे सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल के लिए खास तौर पर बनाए गए सिस्टम यहां इस्तेमाल होते हैं। भारतीय रेलवे का अपना ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क है जो ट्रेन ट्रैक के साथ-साथ चलता है। इतना ही नहीं, रेलवे ऑपरेशन्स के लिए खास तौर पर बनाए गए डेडिकेटेड रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम भी यहां इस्तेमाल होते हैं। इसलिए किसी प्राइवेट टेलीकॉम के नेटवर्क जाने से यहां ट्रेन सेवा पर असर नहीं पड़ सकता है।
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