अगर आप भी अपने मोबाइल में 5G की स्पीड धीमी होती महसूस कर रहे हैं तो अब 5G के दिन बदलने वाले हैं।
भारत में 5G नेटवर्क में बहुत बड़ा बदलाव अगले महीने से देखने को मिल सकता है।
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अगर आप भी अपने मोबाइल में 5G की स्पीड धीमी होती महसूस कर रहे हैं तो अब 5G के दिन बदलने वाले हैं। पिछले कई महीनों से आपने भी गौर किया होगा कि कई बार 5G कनेक्टिविटी होने के बावजूद भी मोबाइल में इंटरनेट कछुए की चाल चलता है। कई बार लगता है कि नेटवर्क 4G से भी निचले स्तर पर चल रहा है। दरअसल इसका कारण 5G पर ट्रैफिक के कारण बढ़ता दबाव हो सकता है जिसके लिए सरकार ने अब समस्या को खत्म करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार की तरफ से टेलीकॉम कंपनियों को इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फील्ड के लिए नए निर्देश जारी करने की खबर है। जिसके बाद 5G की स्पीड में बहुत बड़ा बूस्ट देखने को मिल सकता है। आइए बताते हैं क्या हैं EMF लिमिट के मायने और कैसे बदलेगा का भारत का 5G नेटवर्क!
भारत में 5G नेटवर्क में बहुत बड़ा बदलाव अगले महीने से देखने को मिल सकता है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फील्ड लिमिट (EMF) को अगले महीने से बढ़ाने जा रही है। इसके लिए नए नियम सितंबर से लागू हो जाएंगे। सरकार चाहती है कि भारत में मोबाइल नेटवर्क ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुसार चले। EMF लिमिट को से कम टावर्स के रहते भी बड़े क्षेत्र में 5G की बेहतर कवरेज मिल पाएगी।
कहा जा रहा है कि 5G पर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण मोबाइल नेटवर्क में धीरे-धीरे समस्या देखने को मिल रही है। साथ ही सभी एरिया में नेटवर्क एक समान नहीं चलता है। कहीं स्पीड अच्छी मिलती है तो कहीं पर नेटवर्क स्लो रहता है। EMF लिमिट बढ़ने से नेटवर्क की रेंज कहीं ज्यादा दूर तक फैलेगी और कवरेज बढ़ेगी। रिपोर्ट कहती है कि EMF या रेडिएशन से जुड़े संशोधित नियम अगले महीने से लागू होंगे। वर्तमान में 5G बेस टावर स्टेशन (BTS) के लिए मंजूर पावर डेंसिटी 5W प्रति वर्ग मीटर है। सरकार इसे बढ़ाकर दोगुना करने जा रही है। यानी प्रति वर्ग मीटर में अब 10W की पावर डेंसिटी मिला करेगी।
पावर डेंसिटी बढ़ जाने से 5G सिग्नल को ज्यादा दूरी तक पहुँचने में मदद मिलेगी। जिससे सर्विस प्रोवाइडर हर साइट से कवरेज बढ़ा सकेंगे। इसका एक फायदा यह भी होगा कि नेटवर्क विस्तार की लागत कम हो जाएगी। क्योंकि टावर बढ़ाने की आवश्यकता कम होगी और कम टावर्स के रहते भी ज्यादा एरिया में कवरेज मिलेगी। EMF लिमिट उस अधिकतम रेडियो फ्रिक्वेंसी ऊर्जा को तय करती है जिसे मोबाइल नेटवर्क डिवाइसेज उत्सर्जित कर सकते हैं।
टेलीकॉम कंपनियां काफी समय से EMF के बढ़ाए जाने की मांग कर रही थीं। कंपनियों का कहना था कि मौजूदा EMF लिमिट के चलते 5G की कवरेज पर्याप्त रूप से नहीं हो पा रही है। भारत कई सालों से रेडिएशन एमिशन के लिए ज्यादा कड़े नियमों का पालन कर रहा है। इनकी सिफारिश इंटरनेशनल कमीशन फॉर नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (ICNIRP) नामक संस्था करती है। ICNIRP ऐसी संस्था है जो EMF के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सरकारी एजेंसियों को सलाह देता है।
शुरुआत में भारत 1W प्रति वर्ग मीटर की पावर डेंसिटी लिमिट लेकर चल रहा था। इसे पिछले साल बढ़ाकर 5W प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया था। अब इसे 10W प्रति वर्ग मीटर किया जाएगा। यानी अब दूर के एरिया में भी 5G के सिग्नल बेहतर तरीके से पहुंचेंगे। Jio, Airtel जैसी कंपनियों को भी इससे फायदा होगा और वो ज्यादा बड़े एरिया में कम लागत में कवरेज को बेहतर कर पाएंगीं।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी