दरअसल, नेपच्यून और यूरेनस को लेकर यही माना जाता है कि ये हमारे सौर मंडल के सबसे बाहरी ग्रह हैं, जहां बर्फ ही बर्फ है। इसका मतलब है कि पूरे ब्रह्मांड में हीरे की बारिश हो सकती है।
यूरेनस और नेपच्यून जैसे बर्फीले ग्रहों के अंदर एक्स्ट्रीम कंडीशंस की वजह से विलक्षण कैमिस्ट्री और स्ट्रक्चरल ट्रांजिशन हो सकते हैं। यानी वहां हीरे की या सुपरआयोनिक पानी की बारिश हो सकती है।
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